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सत्ता की चूलें हिलाने यूपी में दाखिल हुए सत्याग्रही

Tue, 09 Oct 2012 12:26 PM IST
आगरा/ब्यूरो/इंटरनेट डेस्क
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जल, जंगल, जमीन के लिए दिल्ली की ओर निकला 50 हजार लोगों का हुजूम सोमवार शाम राजस्थान से यूपी में प्रवेश कर गया। गरीबों, भूमिहीनों, किसानों, आदिवासियों की ये नायाब भीड़ मथुरा और पलवल के रास्ते दिल्ली पहुंचने वाली है। इस समय आगरा के सैयां में दिल्ली-मुंबई हाईवे पर ही एक मिनी शहर सा बस गया है।
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ये वो भूमिहीन आदिवासी हैं जिनके आंसू आजादी के 65 बरस बाद भी किसी ने नहीं पोंछे। न एक अदद छत है, न अनाज का आसरा, न बच्चों के कल की कोई सुरक्षा। 26 राज्यों के 50 हजार लोगों की ये भीड़ जमीन लांघते हुए दिल्ली की तरफ कूच कर रही है।10 से 12 किलोमीटर लंबा या कारवां अभी दिल्ली से दूर है लेकिन इनका मार्च यहीं से सत्ता की चूलें हिला रहा है।

शाम होते ही सत्याग्रहियों का यह अस्थायी शहर लोकसंस्कृति से जीवंत हो उठा। जगह-जगह नृत्य, गायन और वादन की महफिलें सज गईं। एक प्रमुख सांस्कृतिक स्थल पर तो खुद जनसत्याग्रह के अगुवा राजगोपाल पीवी और उनकी विदेशी पत्नी जेनी सांस्कृतिक कार्यक्रम का मजा लेते हुए उनका उत्साह बढ़ा रहे थे।
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राजगोपाल ने आगरा सीमा पर सांस्कृतिक कार्यक्रम के बीच लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि यूपी में प्रवेश हो गया, अब दिल्ली हमारे लिए दूर नहीं रही। केंद्र सरकार को अब आदिवासियों-वंचितों के मुद्दे पर जागना चाहिए, हम अहिंसा से सरकार को गरीबों के हक के लिए झुकने पर मजबूर कर देंगे। यही दृढ़ता उनके जनसैलाब के अंतिम सदस्य में भी दिखती है। बहरहाल इस बीच यह भी सूचनाएं मिली कि केंद्र सरकार इतने बड़े जनसमुद्र को दिल्ली में प्रवेश से रोकने के लिए आगरा में ही समझौता करेगी।

गौरतलब है कि गांधीवादी राजगोपाल पीवी एकता परिषद के बैनर तले कई संगठनों के साथ ग्वालियर से दिल्ली के लिए जनसत्याग्रह पदयात्र लेकर निकले है। वह ऐसी यात्रा 2007 में भी कर चुके हैं। तब केंद्र सरकार ने उनकी तीन प्रमुख पहली मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया था। एक कमेटी भी बनाई थी। मगर उसके बाद सरकार भूल गई। इसीलिए पीवी राजगोपाल ने आदिवासियों और वंचितों को उनका अधिकार दिलाने के लिए फिर सड़क पर उतर पड़े।
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