महिलाओं पर पाबंदियों को लेकर हाल ही में कई बेतुके और उग्र फरमानों से पंचायतों के औचित्य पर चाहे जितने गंभीर सवाल उठे हों और चाहे जितनी छिछालेदर हुई हो, इन सबके बीच इस समाज से रह-रहकर उठते सकारात्मक बदलाव के सुरों में नई सुबह की तलाश भी जारी है। जमाने के साथ कदम से कदम मिलाने की जरूरत और ललक ने ग्रामीण परिवेश को भी सोचने पर मजबूर किया है। अब सर्वखाप चौधरियों ने नारी सशक्तीकरण की आवाज बुलंद करते हुए न केवल महिलाओं पर बेजा पाबंदियों का पुरजोर विरोध किया है, बल्कि उन्हें आगे बढ़ाने की भी जोरदार वकालत कर डाली है। इनमें महिलाओं पर ड्रेस कोड लादने या मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर पाबंदी लगाने का विरोध सबसे प्रमुख है।
'महिला सशक्तीकरण और कुरीति उन्मूलन में सामाजिक संगठनों की जिम्मेदारी' विषय पर स्थानीय कृष्णा गार्डन में रविवार को सर्वखाप स्वरूप समिति के सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता करते हुए गठवाला खाप के यूपी-हरियाणा के दादा बलजीत सिंह मलिक ने लिंग परीक्षण और कन्या भ्रूण हत्या रोकने को और सख्त कदम उठाने की जरूरत पर जोर देते हुए आरोपियों पर दफा 302 लगाने की वकालत की। खापों पर प्रतिबंध लगाने की चर्चाओं पर उन्होंने कहा कि खापों का अस्तित्व बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में पैरवी की जाएगी।
उज्जैन विक्रम यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर एसपीएस अहलावत ने कहा कि सामाजिक कुरीतियों को दूर करने के लिए सामाजिक संगठनों को और मजबूती से काम करना होगा। धनकड़ महासभा हरियाणा के ओपी धनकड़ ने खाप पद्धति को सामाजिक ताने-बाने की रीढ़ बताया और खापों की मजबूती पर बल दिया। नगरपालिकाध्यक्ष अरविंद संगल ने भ्रूण हत्या पर गहरी चिंता जताई। निर्वाल खाप चौधरी चंद्रवीर सिंह ने कहा कि खापों से ही देश का अस्तित्व बचा है। सरकार को चाहिए कि वह खापों को और अधिकार दे। खापों से कहा कि वह समाज हित में कार्य करें।
महालक्ष्मी कालेज मेरठ की प्रबंध कार्यकारिणी उपाध्यक्ष समाजसेवी सुशीला सिंह, सीएम यादव और सीमा मलिक ने सवाल उठाया कि आज की महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं हैं तो फिर उन पर इस तरह की पाबंदियां क्यों? उन्होंने कहा कि समाज महिला को अबला नहीं, सशक्त और दुर्गा के रूप में देखे। भ्रष्टाचार दूर करने को सिटीजन चार्टर को प्रभावी ढंग से लागू करने की जरूरत है।
सर्वखाप समिति के अध्यक्ष ओमप्रकाश मलिक ने मंसूरपुर में महिला के साथ बस में हुई छेड़छाड़ और धामपुर में गैंगरेप पीड़िता के स्कूल में आने पर पाबंदी लगाने की घटनाओं पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सरेआम महिलाओं और बच्चियों के साथ घटनाएं होती हैं, लेकिन लोग बदमाशों का मुकाबला करने की बजाय, पीड़िताओं को ही हीन भावनाओं से देखते हैं, जो सही नहीं है।