पाकिस्तान की कुख्यात कोट लखपत जेल में दम तोड़ने वाले सरबजीत सिंह पहले भारतीय नहीं हैं।
इसी साल जनवरी में उनसे पहले भारतीय कैदी चमेल सिंह की भी संदिग्ध हालातों में मौत हो गई थी।
जेल में साथी कैदियों द्वारा खतरनाक रूप से हमला करने के बाद करीब एक हफ्ते तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद सरबजीत ने बुधवार देर रात दम तोड़ दिया था।
वर्तमान में करीब 36 भारतीय कैदी अभी भी इस जेल में बंद हैं।
इस हाई सिक्योरिटी वाली जेल में ही जनवरी, 2013 में एक और भारतीय कैदी चमेल सिंह की संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी।
करीब 60 साल के चमेल सिंह को उसी अस्पताल में डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था, जिसमें सरबजीत ने दम तोड़ा है।
कथित तौर पर जासूसी में लिप्त होने के मामले में उसे पांच साल की सजा सुनाई गई थी। उस समय पाकिस्तानी मीडिया ने दावा किया था कि पोस्ट मार्टम की शुरुआती रिपोर्ट इस बात का संकेत देती है कि चमेल सिंह को काफी प्रताड़ित किया गया था। हालांकि जेल प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था।
कोट लखपत जेल की क्षमता महज 4 हजार कैदियों की है, लेकिन इसके चार गुना कैदी इस जेल में हैं। वर्तमान में करीब 17 हजार कैदी इस जेल में बंद हैं। पिछले हफ्ते भारत-पाक न्यायिक कमेटी के भारतीय सदस्यों ने भारतीय कैदियों से बात की थी।
कुछ कैदियों ने शिकायत की थी कि जिस समय सरबजीत पर हमला हुआ, उस समय कोई भी सुरक्षाकर्मी उनकी मदद के लिए मौजूद नहीं था। कमेटी ने कराची और रावलपिंडी की जेलों में बंद भारतीय कैदियों से भी बात की थी।
हमने अधूरी कोशिशें की: सलमान खान
पिछले साल सरबजीत की रिहाई के लिए ऑनलाइन अभियान चलाने वाले बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान ने इस भारतीय कैदी की मौत पर दुख जाहिर किया है।
सलमान ने ट्विटर सरबजीत की मौत पर अफसोस जताते हुए कहा, ‘हम सभी ने कोशिशें की, लेकिन शायद इसमें कमी रह गई। भगवान उनके परिवार को शक्ति प्रदान करे और सरबजीत की आत्मा को शांति दे।’