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सारा केस में लापरवाही, अमनमणि को बचाती रही पुलिस

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सारा की मौत के मामले में पुलिस ने हत्या का केस तो दर्ज किया लेकिन इसकी ठीक से जांच-पड़ताल नहीं की।
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अब सीबीआई जांच शुरू होते ही पुलिस की लापरवाही सामने आई है। जो लोग शक के दायरे में आए, उनसे पुलिस ने पूछताछ तक नहीं की। अब ये नाम सीबीआई को दिए गए हैं।

दूसरी बड़ी लापरवाही फोरेंसिक जांच रिपोर्ट का केस डायरी में उल्लेख न किया जाना रही। पहले आगरा की फोरेंसिक टीम ने मौका ए वारदात का परीक्षण किया। इसके बाद लखनऊ से एक्सपर्ट आए।
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आगरा की फोरेंसिक रिपोर्ट में हादसे का इशारा था जबकि लखनऊ की टीम हत्या मानकर चल रही थी। पुलिस सूत्रों ने बताया कि विरोधाभास के चलते दोनों में से किसी भी लैब ने रिपोर्ट नहीं दी।
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सीबीआई ने शुरू की जांच

पुलिस की लापरवाही यह रही कि इसे हासिल करने के लिए खत तक नहीं लिखा गया। हैरानी की बात यह है कि आगरा लैब से सारा सिंह के कपड़ों की रिपोर्ट तो मांगी गई लेकिन मौका ए वारदात के परीक्षण की नहीं।

पुलिस ने सारा के शव का पोस्टमार्टम सीएचसी के डाक्टर से कराया। जबकि मामला हाईप्रोफाइल होने के चलते जिला अस्पताल के डाक्टरों के पैनल से कराना चाहिए था। वो भी कैमरे की नजर से।

मौका ए वारदात से कार भी तुरंत हटवा दी गई थी। इससे सच सामने आना और मुश्किल हो गया। कुल मिलाकर पुलिस ने गुत्थी सुलझाने के बजाय उलझाने का काम किया।
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