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PMO फंड के बाद भी वेटिंग लिस्ट ने ली संतोष की जान

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किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी के लिए पीएम कार्यालय से करीब पांच महीने पहले ही सहायता मिलने के बाद भी वाराणसी के 33 वर्षीय एक युवक की मौत हो गई। बुधवार की सुबह अपनी बारी का इंतजार कर रहे इस युवक ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।
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पीएम कार्यालय ने संतोष कुमार के नाम पर फरवरी माह में ही लखनऊ के संजय गांधी पीजीआई अस्पताल में 2.17 लाख रुपये जमा करा दिए थे। लेकिन अस्पताल प्रशासन का कहना है कि वह अगले आठ महीनों तक किडनी सर्जरी के किसी भी नए मामले के निस्तारण की स्थिति में नहीं है।

वाराणसी से लेकर लखनऊ तक के बीजेपी नेताओं ने इस युवक ईलाज के लिए अस्पताल प्रशासन से गुहार लगाई लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ। बताया जाता है कि संतोष के परिजनों का छह साल पहले ही निधन हो गया था और वह फिलहाल अपनी बड़ी बहिन रीता के घर रह रहा था।
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फोटो साभार- द इंडियन एक्सप्रेस

4.37 लाख का मिला था इस्टीमेट

द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक वाराणसी के रोहनिया क्षेत्र की रहने वाली रीता को पीजीआई से किडनी ट्रांसप्लांट के लिए 4.37 लाख का इस्टीमेट मिला था जिसके बाद उन्होंने आर्थिक मदद के लिए पीएम के संसदीय कार्यालय का रूख किया।

उन्होंने बताया कि उनकी गुहार के बाद पीएमओ ने फरवरी में ही अस्पताल के खाते में 2.17 लाख रुपये जमा करा दिए लेकिन अस्पताल के डॉक्टर यह कहते हुए लगातार तारीख बढ़ाते गए कि उनके पास ऐसे मरीजों की लम्बी फेहरिस्त है। रीता ने बताया, 'इसके बाद मैंने वाराणसी में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी से मुलाकात की, उन्होंने इस मामले में पीजीआई के डायरेक्टर से बात की लेकिन कोई समाधान नहीं निकल पाया।

उन्होंने बताया कि पीजीआई के डायरेक्टर प्रो. राकेश कपूर हमें लगातार किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में पीजीआई के डॉक्टरों के सुपरविजन में ईलाज करवाने की सलाह देते रहे लेकिन हमने इंतजार करना ही बेहतर समझा।'
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पीजीआई डायरेक्टर ने दी सफाई

बुधवार को जब संतोष की हालत ज्यादा बिगड़ गई तो हम उसे बीएचयू अस्पताल लेकर गए जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। रीता ने भाई की मौत के लिए राजनेताओं और पीजीआई प्रशासन को दोषी ठहराया। उन्होंने कहा कि अगर इन लोगों ने जरा सी भी संवेदनशीलता दिखाई होती तो संतोष की जान बच जाती।

वहीं इस मामले में राकेश कुमार ने अपनी सफाई देते हुए कहा कि लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने उनकी 20 दिन पहले बात हुई थी। मैंने उन्हें बताया कि  किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी के लिए आठ महीनों की वेटिंग लिस्ट है। यह लिस्ट ऑनलाइन उपलब्ध है जिसमें किसी तरह के बदलाव की कोई गुंजाइश नहीं है।
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