मुंबई ब्लास्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म अभिनेता संजय दत्त को पांच साल की सजा सुनाई है। अदालत ने उन्हें चार सप्ताह के भीतर सरेंडर करने को कहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने आर्म्स एक्ट में दोषी ठहराए गए संजय दत्त की सजा छह साल से घटाकर पांच साल कर दी। टाडा कोर्ट ने उन्हें छह साल की सजा सुनाई थी।
संभव है कि संजय दत्त की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की जाए और अगर उसे स्वीकार कर लिया गया तो शायद उन्हें चार हफ्ते की जगह पांच या छह हफ्ते की मोहलत मिल जाए। इससे ज्यादा उन्हें कोई राहत मिलने की उम्मीद नहीं है।
साढ़े तीन साल और जेल में रहना होगा
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद संजय दत्त को अब भी साढ़े तीन साल से अधिक समय तक जेल में रहना होगा। वे पहले ही 16 महीने जेल में बिता चुके हैं।
न्यायमूर्ति पी सदाशिवम और न्यायमूर्ति बीएस चौहान की खंडपीठ ने छह खंडों में लिखित अपने फैसले में उन्हें चार सप्ताह के भीतर सरेंडर करने को कहा है। अभी यह तय नहीं है कि वे कब और कहां सरेंडर करेंगे।
क्या कहूं समझ में नहीं आ रहा: प्रिया दत्त
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद संजय दत्त की बहन प्रिया दत्त रो पड़ीं। बेहद आहत प्रिया ने कहा, 'क्या कहूं कुछ समझ में नहीं आ रहा है'।
अदालत ने नहीं मानी संजय की गुजारिश
संजय दत्त ने इस मामले में उनके नेक चाल-चलन (अच्छे आचरण) को ध्यान में रखते हुए उन्हें दोष मुक्त किए जाने की गुजारिश की थी।
विशेष अदालत ने संजय दत्त को 21 जुलाई, 2001 को आर्म्स एक्ट के तहत अवैध हथियार रखने के जुर्म में 6 साल की सजा सुनाई थी।
याकूब मेमन की फांसी की सजा बरकरार
मुंबई ब्लास्ट मामले में ही उच्चतम न्यायालय ने याकूब मेनन की फांसी की सजा को बरकरार रखा। कोर्ट ने कहा कि याकूब मेमन भगोड़े आरोपियों के बाद हमले का सबसे बड़ा दोषी है। वहीं, फांसी की सजा पा चुके 10 दोषियों की सजा को कोर्ट ने उम्रकैद में बदल दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 1993 के बम धमाकों के पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई का भी हाथ था। दोषियों को बम बनाने और अत्याधुनिक हथियारों का प्रशिक्षण पाकिस्तान में ही मिला था।
कोर्ट ने टाडा अदालत में उम्रकैद की सजा पाए 20 दोषियों में से 17 की सजा को बरकरार रखा, जबकि एक दोषी की उम्रकैद की सजा को 10 साल की कैद में बदल दिया।
1993 के मुंबई धमाकों के मामले में दोषियों ने सुप्रीम कोर्ट में सजा के खिलाफ अपील की थी। वहीं सीबीआई ने मांग की कि दोषियों की सजा बढ़ाई जाए।
इस मामले में टाडा कोर्ट ने 12 दोषियों को मौत की सजा सुनाई थी जबकि 20 को उम्रकैद की सजा दी थी।
गौरतलब है कि मुंबई में हुए इन सीरियल ब्लास्ट में 257 लोगों की मौत हो गई थी और 700 से ज्यादा घायल हो गए थे।