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गांधी की हत्या का दाग छुड़ाना चाहता है संघ

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हत्या के आरोपों से हमेशा के लिए अपना पीछा छुड़ाना चाहता है।
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केंद्र में अपने स्वयं सेवक नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बहुमत की सरकार बनने के बाद संघ अब समाज में फैली अपने खिलाफ सभी भ्रांतियों को दूर करना चाहता है। संघ अब पुस्तकों के जरिये समाज के बुद्धिजीवी वर्ग के बीच अपनी भ्रांतियों को दूर करने के प्रयास में जुटा है।

इस प्रयास के तहत संघ के प्रचार विभाग की ओर से दो विशेष पुस्तकें छपवाई गई हैं, जिनमें गांधी की हत्या, मुस्लिम और इसाइयों से संघ के संबंध, महिलाओं को लेकर संघ का दृष्टिकोण सरीखे अहम मामलों पर उसके नजरिये का खुलासा किया गया है।
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विश्व हिंदू परिषद ने भी अपनी कट्टर हिंदूवादी छवि से ऊपर उठने के लिए अपने कामकाज को लेकर किताब तैयार कराई है। 21 दिसंबर को इसके विमोचन की तैयारी है।
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किताब छपवा कर ‘भ्रांतियां’ दूर करने की कोशिश

संघ ने हाल ही में आरएसएस एक परिचय और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ-सरल परिचय, सरीखे दो पुस्तकों का प्रकाशन कराया है। संघ ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हत्या के आरोपों से अपने संगठन को पाक-साफ दिखाने की कवायद में संघ ने गुरु गोलवलकर के उस समय के प्रेस व्यक्तव्यों का सहारा लिया है।

संघ का कहना है कि तब दूषित पूर्वाग्रह के कारण गोलवलकर के विचारों को प्रेस में उचित ढंग से पेश नहीं किया गया।

उस समय गोलवलकर ने संघ को जो व्यक्तव्य जारी किया था उसमें उन्होंने गांधी की हत्या पर दु:ख जताते हुए इस घटना को अतुलनीय भीषण त्रासदी करार दिया था। क्योंकि इसका खलनायक देश का नागरिक होने के साथ एक हिंदू था।

गोडसे को विकृत मनोवृति का करार देते हुए गोलवलकर ने उनके कार्य को लज्जापूर्ण करार दिया था। गांधी सरीखे महापुरूष की हत्या को संघ नेता ने अक्षम्य राष्ट्रविरोधी कार्य करार दिया था।

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ-सरल परिचय, में संघ की ओर से गुरु गोलवलकर के द्वारा भेजे गए तार संदेशों का भी हवाला दिया है जो उन्होंने गांधी की हत्या के बाद जगह-जगह भेजे थे।

31 जनवरी 1948 को भेजे गए एक तार संदेश के जरिये गोलवलकर ने महात्मा गांधी के दु:खद मृत्यु पर संघ के सभी दैनिक कार्यक्रमों को 13 दिन बंद रखने की सूचना के साथ शोक-पालन करने का सभी स्वयंसेवकों को निर्देश दिया था।
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