टिकटों के वितरण को लेकर घमासान से जूझ रही भाजपा के नेतृत्व को राष्ट्रीय स्वयं प्रमुख मोहन भागवत का सहारा मिल गया है।
संघ प्रमुख ने भाजपा के पितामह लालकृष्ण आडवाणी की मौजूदगी में कहा कि समय के साथ बदलाव जरूरी है। इसे अच्छे मन से स्वीकार किया जाना चाहिए।
संघ प्रमुख के इस बयान से साफ है कि उन्होंने नरेंद्र मोदी और राजनाथ की जोड़ी की बुजुर्ग नेताओं को चुनावी राजनीति से दूर रखने की रणनीति पर मुहर लगा दी है।
आडवाणी समेत अन्य बुजुर्ग नेताओं को नसीहत
संघ प्रमुख के इस बयान को आडवाणी से लेकर डॉ मुरली मनोहर जोशी, लालजी टंडन, कलराज मिश्र व जसवंत सिंह सरीखे बुजुर्ग नेताओं के लिए नसीहत भी माना जा रहा है।
संघ के मुखपत्र पांचजन्य और ऑर्गेनाइजर के रीलांच समारोह में संघ प्रमुख ने कहा कि समय के साथ बदलाव जरूरी है। संघ लंबे समय से भाजपा में नए नेतृत्व को आगे लाने की कोशिश करता रहा है।
इसी रणनीति के तहत चार साल पहले नितिन गडकरी को पार्टी अध्यक्ष बनाया गया और अब नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री उम्मीदवार घोषित किया गया।
75 साल से अधिक के नेता राजनीति से हटें
संघ चाहता था कि भाजपा में 75 साल से ज्यादा उम्र के नेताओ को लोकसभा की चुनावी राजनीति से हट जाना चाहिए ताकि नया नेतृत्व आगे आ सके। लेकिन भाजपा को इस बार भी आडवाणी, जोशी के अलावा शांता कुमार और बीसी खंडूरी जैसे उम्रदराज नेताओं को मैदान में उतारना पड़ा।
गांधीनगर के बजाए भोपाल से चुनाव लड़ने की जिद पर अड़े आडवाणी भी संघ की दखल के बाद ही माने। लेकिन जसवंत सिंह, लालमुनि चौबे और हरिन पाठक जैसे बुजुर्ग नेताओं के तीखे तेवरों के बीच संघ प्रमुख ने समय के साथ बदलाव जरूरी कहकर नरेंद्र मोदी और राजनाथ सिंह को बहुत बड़ा समर्थन दे दिया है।