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ताजमहल के आसपास तीन सड़कों पर बनेंगी सेंड स्टोन की सड़कें

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ताजमहल के 500 मीटर दायरे में ताजगंज प्रोजेक्ट के तहत सड़कें अब रेड सैंड स्टोन से बनाई जाएंगी। प्रदेश सरकार द्वारा लगवाए जा रहे कोबल स्टोन पर एएसआई की आपत्ति के बाद सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को हुई सुनवाई में लाल पत्थर (रेड सैंड स्टोन) से ही सड़कें बनाने के निर्देश दिए। अमर उजाला ने ताजगंज प्रोजेक्ट में कोबल स्टोन लगाने के फैसले पर सवाल खड़े किए थे।
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बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में प्रदेश सरकार की ओर से अधिवक्ता एमआर शमशाद पेश हुए। उन्होंने कहा कि दिसंबर में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर एएसआई के साथ यूपी टूरिज्म की बैठक हुई थी, उसमें 11 विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया था। एएसआई की आपत्तियों के साथ उनके सुझाव प्रदेश सरकार को मान्य हैं।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने एएसआई की रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए कोबल स्टोन की अनुमति मांगने की याचिका खारिज कर दी और रेड सैंड स्टोन लगाने के निर्देश दिए। एएसआई ने सुप्रीम कोर्ट में जो रिपोर्ट पेश की, उसके मुताबिक ताजमहल की वास्तुकला और निर्माण में कहीं भी ग्रेनाइट का उपयोग नहीं किया गया है।
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अमर उजाला ने खामियों को किया था उजागर

लाल पत्थर का प्रयोग मस्जिद, मेहमानखाना और मुख्य प्रवेश द्वारों पर किया गया है। फतेहपुर सीकरी और जोधपुर में भी रेड सैंड स्टोन की सड़क स्मारक के बाहर बनाई गई है। उसी के आधार पर राजकीय निर्माण निगम ने सैंपल भी बनाने शुरू कर दिए थे। आईआईटी रुड़की से सैंड स्टोन की मजबूती का आकलन भी कराया गया है।

सत्ता की हनक में बनाए जा रहे ताजगंज प्रोजेक्ट में डिजायन, क्वालिटी और धन के दुरुपयोग पर अमर उजाला ने लगातार सवाल खड़े किए। चार बार प्रोजेक्ट की कीमत बढ़ने से लेकर आर्किटेक्ट के बदलने, कोबल स्टोन लगाने से प्रोजेक्ट की तस्वीर बदलने पर सवाल उठाए गए।

सत्ताधारियों ने मनमाने ढंग से ताजमहल की एकरूपता की जगह प्रोजेक्ट में मनमाने डिजायन तय किए और इसे महज 500 मीटर में कुरूप और हास्यास्पद बना दिया। सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले से अमर उजाला द्वारा उठाए गए सवालों पर ही मुहर लगी है।
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