वर्ष 2007 के समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को शनिवार को बड़ी कामयाबी मिली। एनआईए ने भारत-पाकिस्तान के बीच चलने वाली इस ट्रेन में बम रखने के आरोपी राजेंद्र चौधरी को मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले से गिरफ्तार किया है। राजेंद्र उर्फ समुंदर उर्फ दशरथ पर पांच लाख रुपये का इनाम घोषित था।
सूत्रों ने बताया कि राजेंद्र को उज्जैन में एक कोर्ट में पेश किया गया जहां से उसे ट्रांजिट रिमांड पर एनआईए को दे दिया गया है। एनआईए अब उसे हरियाणा की पंचकुला कोर्ट में पेश करेगी। यह गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है, जबकि पाकिस्तान के गृह मंत्री रहमान मलिक भारत दौरे पर हैं।
इस मामले में यह चौथी गिरफ्तारी है। समझौता ब्लास्ट मामले में एनआईए कमल चौहान, असीमानंद और लोकेश शर्मा को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। समझौता ब्लास्ट की शुरुआती जांच रेलवे पुलिस और हरियाणा पुलिस की विशेष जांच टीम ने की थी।
बाद में 29 जुलाई, 2010 को जांच एनआईए को सौंप दी गई। एनआईए ने 20 जून, 2011 को स्वामी असीमानंद, सुनील जोशी (अब मृत), लोकेश शर्मा, संदीप डांगे और रामचंद्र कालसांगरा उर्फ रामजी के खिलाफ विशेष कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी। डांगे और रामजी अभी फरार हैं।
जांच एजेंसी ने इस साल अगस्त में हत्या, साजिश और अन्य आरोपों में आरएसएस कार्यकर्ता कमल चौहान और उसके सहयोगी अमित के खिलाफ पंचकुला की विशेष कोर्ट में पूरक आरोप पत्र भी दाखिल किया था।
सूत्रों के अनुसार, सुनील जोशी के करीबी सहयोगी लोकेश ने कमल चौहान और राजेंद्र चौधरी को पुरानी दिल्ली स्टेशन से चलने वाली समझौता एक्सप्रेस में बम रखने की रेकी करने के लिए दिसंबर 2006 में भेजा था। दोनों 17 फरवरी, 2007 को इंदौर आए और इसके अगले दिन इन्होंने ट्रेन में सूटकेस बम प्लांट किए।
क्या है समझौता ब्लास्ट
18 फरवरी, 2007 को पाकिस्तान जा रही समझौता एक्सप्रेस में हरियाणा के पानीपत के पास बम विस्फोट हुआ। इसमें 68 लोगों की मौत हो गई थी और 12 यात्री घायल हो गए थे। मृतकों में ज्यादातर पाकिस्तानी नागरिक थे।