लोकसभा चुनाव की तेज होती आहट के बीच सपा ने सोमवार को उत्तर प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग कर सियासत को अचानक गरमा दिया।
बिहार की ऐसी ही मांग पर केंद्र की नरमी को देखते हुए पार्टी ने यूपी को विशेष राज्य का दर्जा देने को कहा। अपनी मांग पर सपा सांसदों ने राज्यसभा में जमकर हंगामा किया और केंद्र पर प्रदेश के साथ रूखा व्यवहार करने का आरोप लगाया।
बसपा सुप्रीमो मायावती ने सपा की मांग को महज चुनावी ड्रामा करार दिया और यूपी सरकार की अब तक चुप्पी पर सवाल खड़े किए। हालांकि मायावती ने यह जरूर कहा कि प्रदेश विशेष राज्य का दर्जा हासिल करने का हकदार है।
राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होते ही सपा सांसदों ने इस मुद्दे को उठाया और जमकर नारेबाजी की। इससे सदन की कार्यवाही दो बार बाधित भी हुई।
भाजपा और वामदलों के सदस्यों ने कोल ब्लॉक आवंटन से जुड़े दस्तावेज गायब होने और प्याज की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी के मसले पर भी हंगामा किया।
सपा नेता नरेश अग्रवाल ने कहा कि केंद्र सरकार बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने जा रही है और उत्तर प्रदेश की उपेक्षा कर रही है।
सपा के हंगामे को रोकने के लिए संसदीय कार्य राज्यमंत्री राजीव शुक्ला ने बीच में दखल दिया, जिसके बाद सपा सदस्यों ने अपना हंगामा बंद किया।
सदन से बाहर बसपा सुप्रीमो ने कहा कि लोकसभा चुनाव को देखते हुए सपा इस मसले को उठा रही है। सपा पिछले एक साल से सत्ता में है आखिर अब तक क्यों चुप बैठी थी।
मायावती ने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति लगातार बिगड़ रही है और चुनाव निकट है। इसलिए सपा अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए इस तरह का नाटक कर रही है।
उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड, पूर्वांचल और अवध जैसे क्षेत्रों के पिछड़ेपन को देखते हुए सत्ता में आने पर बसपा सबसे पहले प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग उठाई थी लेकिन भाजपा या कांग्रेस में से किसी ने हमारा समर्थन नहीं किया था।
हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा कि उत्तर प्रदेश भी बिहार की तरह विशेष पैकेज पाने की योग्यता पूरी करता है।