इक्कीस साल तक खुफिया एजेंसियों की आंखों में धूल झोंकने वाला सलीम पतला कम्युनल आतंकवाद का मास्टरमाइंड माना जाता है। सलीम ने उत्तर प्रदेश के सभी संवेदनशील जनपदों में अपना नेटवर्क खड़ा कर लिया था। उसके गुर्गे किसी भी शहर में दंगा कराने में माहिर हैं। सलीम बांग्लादेश के एक दुर्दांत आतंकी संगठन से गोला बारूद लेता था। आतंकियों के लिए हथियारों का भी वह बड़ा सप्लायर रहा है। खुफिया एजेंसियां अब इन सभी बिंदुओं पर बारीकी से जांच कर रही हैं।
सलीम पतला, सलीम मोटा और जब्बार। यह वह दहशतगर्द थे जिनका नाम 27 जनवरी 1993 को मेरठ पीएसी बम कांड में सामने आया था। सलीम पतला तो फरार हो गया था जबकि बाकी सभी आतंकी गिरफ्तार कर लिए गए थे। सलीम पतला की तलाश में एसटीएफ और एटीएस को लगाया गया था। वह हाथ तो नहीं आया लेकिन उसका नेटवर्क समय समय पर सामने आता रहा।
उस समय खुफिया एजेंसियों को जो जानकारी मिली थी उसके मुताबिक सलीम ने एक ऐसा गैंग तैयार कर लिया था जो कहीं भी दो वर्गों को लड़ाकर दंगा करा सकता था। प्रदेश के सभी संवेदनशील जनपदों में उसका नेटवर्क था। हालांकि इन इक्कीस वर्षों के भीतर किसी मामले में उसका नाम तो सामने नहीं आया लेकिन माना जा रहा है कि वह बड़ी खामोशी के साथ आतंकियों के लिए काम कर रहा था।