अल्लाह...सहारनपुर तो ऐसा नहीं था। यहां कभी भी कर्फ्यू जैसे हालात नहीं देखे थे। ऐसा कैसे हो गया। खुदा अमन चैन लौटाए और ऐसा दंगा फसाद करने वालों को दोजख भी नसीब न हो। जो शहर को जलाने का काम करते हैं....। ये शब्द हैं पाकिस्तान के लाहौर में ब्याही रेशमा के। रेशमा 14 जुलाई को दो बच्चों तैमूर और कबीर के साथ सहारनपुर के किला नवाब गंज में मायके आई हुईं हैं।
अमर उजाला से बातचीत में उनके दिल में दंगे का दर्द साफ झलका। कहा कि फंसादियों का कोई ईमान नहीं होता। दंगे का नुकसान सभी को उठाना पड़ता है, चाहे वह किसी भी धर्म का हो, अमीर हो या गरीब। कोई दंगा नहीं चाहता, लेकिन कुछ स्वार्थी लोग शहर को आग में झोंक देते हैं।
बोलीं की पाकिस्तान में इन दिनों स्कूलों की छुट्टियां होती हैं तो बच्चों के साथ यहां आ गई थी। ऐसा सहारनपुर कभी नहीं देखा। शौहर आमिर मिर्जा रोजाना फोन कर खैरियत पूछते हैं और शहर के हालात पर बात करते हैं। सवाल करते हैं दंगा किसने कराया तो मेरा जवाब यहीं होता है कि कुछ स्वार्थी लोग थे।