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दंगा सहारनपुर में, चिंता पाकिस्तान में

Thu, 31 Jul 2014 07:33 AM IST
विवेक कुमार/अमर उजाला, सहारनपुर
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अल्लाह...सहारनपुर तो ऐसा नहीं था। यहां कभी भी कर्फ्यू जैसे हालात नहीं देखे थे। ऐसा कैसे हो गया। खुदा अमन चैन लौटाए और ऐसा दंगा फसाद करने वालों को दोजख भी नसीब न हो। जो शहर को जलाने का काम करते हैं....। ये शब्द हैं पाकिस्तान के लाहौर में ब्याही रेशमा के। रेशमा 14 जुलाई को दो बच्चों तैमूर और कबीर के साथ सहारनपुर के किला नवाब गंज में मायके आई हुईं हैं।
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अमर उजाला से बातचीत में उनके दिल में दंगे का दर्द साफ झलका। कहा कि फंसादियों का कोई ईमान नहीं होता। दंगे का नुकसान सभी को उठाना पड़ता है, चाहे वह किसी भी धर्म का हो, अमीर हो या गरीब। कोई दंगा नहीं चाहता, लेकिन कुछ स्वार्थी लोग शहर को आग में झोंक देते हैं।

बोलीं की पाकिस्तान में इन दिनों स्कूलों की छुट्टियां होती हैं तो बच्चों के साथ यहां आ गई थी। ऐसा सहारनपुर कभी नहीं देखा। शौहर आमिर मिर्जा रोजाना फोन कर खैरियत पूछते हैं और शहर के हालात पर बात करते हैं। सवाल करते हैं दंगा किसने कराया तो मेरा जवाब यहीं होता है कि कुछ स्वार्थी लोग थे।
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दंगे के कारण घर में कैद हुआ परिवार

कुछ ऐसी मनोदशा से गुजर रहा है चौक फरोशान निवासी मोहम्मद साहिल का परिवार। उसकी भी लाहौर निवासी बहन शबाना पत्नी वसीम भी तीन बच्चों के साथ यहां आई हुई है। दंगे के कारण घर में कैद है।

पूछने पर भाई साहिल बताते हैं कि बहनोई का परिवार खासी चिंता में है। रोजाना हाल चाल पूछते हैं। बच्चें भी उदास हैं, घर में कैद होकर रह गये हैं। सवाल करते हैं कि मामू, यह कर्फ्यू कब खुलेगा। कर्फ्यू की वजह से ईद भी फीकी रही। न कहीं आ सके और न जा सके। सिर्फ घर में ही कैद होकर रह गये।

12 परिवार हैं जिले में
इस साल एक जनवरी से जुलाई तक 70 से अधिक पाकिस्तानी नागरिकों ने सहारनपुर में आमद कराई। इनमें से अधिकांश जा चुके हैं और 12 परिवार ही यहां वर्तमान में वीजा पर रुके हुए हैं। एसएसपी राजेश पांडे का कहना है कि सभी की सुरक्षा पुलिस की प्राथमिकता है। विदेशी नागरिकों की सुरक्षा के विशेष निर्देश दिए गए हैं।
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