मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर एक्टर हैं या क्रिकेटर, एक आरटीआई के जरिए ये सवाल पूछा गया है। जिसका जवाब सीपीआईओ ने दिया है।
प्रथम अपीलीय प्राधिकार (सीपीआईओ) ने कहा है कि सवाल का जवाब आयकर केंद्र की ओर से दिया जा चुका है। जिसमें सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा गया था कि आयकर रिटर्न संबंधी सूचना निजी है।
उसे तब तक सार्वजनिक नहीं किया जा सकता जब तक कि जनहित का बड़ा मसला शामिल नहीं हो। आरटीआई कार्यकर्ता इस फैसले के खिलाफ मुख्य सूचना आयोग में जल्द अपील करेंगे।
सीपीआईओ ने किया निपटारा
देश का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न पाने वाले सचिन के मामले में यह आरटीआई सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता प्राणेश की ओर से उस आधार पर की गई थी, जिसमें आयकर बचाने के लिए सचिन ने अपना मुख्य काम क्रिकेट खेलना नहीं, बल्कि एक्टिंग बताया था।
यह आरटीआई राष्ट्रपति भवन भेजी गई थी और वहां से जवाब मुहैया कराने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्रालय और राजस्व विभाग भेज दी गई।
मंत्रालय ने इसके बाद आरटीआई को जवाब देने के लिए आयकर विभाग को भेज दिया। आयकर विभाग ने टैक्स संबंधी सूचना को निजी करार देते हुए सूचना मुहैया कराने से इनकार कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट के वकील ने दायर की थी आरटीआई
आरटीआई कार्यकर्ता ने इसके खिलाफ सीपीआईओ के समक्ष अपील की, लेकिन सीपीआईओ ने इसका निपटारा करते हुए कहा कि आरटीआई से जुड़े सवाल का जवाब दिया जा चुका है।
हालांकि सचिन की ओर से एक्टर होने के दावे की पुष्टि मुंबई में आयकर विभाग के सहायक आयुक्त के सामने की गई अपील करती है। इसमें खुद तेंदुलकर ने 2008 में यह दावा करते हुए किया था कि उनका मुख्य कार्य एक्टिंग है, क्रिकेट खेलना नहीं।
सचिन की ओर से यह अपील अक्टूबर, 2003 में आयकर रिटर्न भरने के बाद समीक्षा अधिकारी की ओर से उनके एक्टर होने के दावे को खारिज किए जाने के बाद दायर की गई थी।
आयकर विभाग का सूचना देने से इनकार
दरअसल आयकर अधिनियम की धारा 80-आरआर के तहत एक्टर होने पर उन्होंने एक कलाकार होने के आधार पर छूट का दावा किया था। समीक्षा अधिकारी की ओर से एक्टर होने का दावा खारिज होने पर उन्हें छूट नहीं मिलती।
ऐसे में उनकी अपील पर आयकर विभाग के सहायक आयुक्त ने सचिन के एक्टर होने के दावे को स्वीकार कर लिया।
लेकिन विभाग ने इसके बाद हाईकोर्ट में अपील की या नहीं, इस बारे में विभाग के अधिकारियों ने चुप्पी साध ली थी। इसके बाद ही ये आरटीआई दायर हुई।