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सरकार के कामकाज पर RSS की पैनी नजर

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लोकसभा चुनाव के इतिहास में भाजपा के लिए अब तक की सबसे बड़ी जीत पक्की करने के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ चुपचाप बैठे नहीं रहना चाहता। संघ ने नरेंद्र मोदी सरकार और इसके कर्ता-धर्ताओं के कामकाज पर पैनी निगाह बनाए रखने का फैसला किया है।
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यूपीए सरकार के दौरान लिए गए फैसलों में संशोधन करने या उन्हें हटाने के लिए वह मोदी सरकार पर दबाव बढ़ा सकता है। संघ आधार योजना और बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान को लेकर मुखर हो सकता है और इसके लिए मोदी सरकार पर दबाव बना सकता है।

मोदी के काम पर बारीक नजर

संघ के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक दत्तात्रेय होसाबाले, सुरेश सोनी, कृष्ण गोपाल, भैयाजी और माथुरजी जैसे वरिष्ठ नेताओं की एक कमेटी मोदी सरकार के कामकाज पर नजदीकी नजर बनाए रखेगी। ऐसा पहली बार होने जा रहा है कि संघ की कोई कमेटी एनडीए सरकार के कामकाज पर नजर रखेगी और नीतिगत मुद्दों पर समय-समय पर सलाह देगी।

कमेटी पहले से चल रहे सरकारी कार्यक्रमों और नीतियों में भी बदलाव की हिदायत देगी। फिलहाल मोदी और अमित शाह का संघ के आला पदाधिकारियों से अच्छा तालमेल है। सरकार के कामकाज और उसकी नीतियों को लेकर दोनों तरफ के लोगों की लगातार बैठक होती हैं। वैसे आगे चल कर शाह ही आरएसएस और सरकार के बीच संवाद की अहम कड़ी होंगे।

ऐसा माना जाता है कि वाजपेयी सरकार संघ के दबाव का विरोध करती रही थी और कई बार वह अहम मुद्दों पर फैसला लेते समय इसके नेतृत्व को नजरअंदाज भी कर देती थी। यही वजह है संघ की एक कमेटी न सिर्फ मोदी सरकार और पार्टी के कामकाज पर नजर रखेगी बल्कि उनके बीच समन्वय का भी काम करेगी।

आतंक पर पाक के खिलाफ अपनाएं कड़ा रुख

संघ का मानना है कि सरकार पाकिस्तान के  साथ आतंकवाद के मुद्दे पर कड़ा रवैया अपनाए। संघ के नेताओं का कहना है कि देश के ज्यादातर लोग पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा रवैया अपनाए जाने के पक्ष में हैं।

अगर ऐसा नहीं होता है तो यह सरकार की छवि और उसे मिले जनादेश को नुकसान पहुंचाएगा। पाकिस्तान के साथ बातचीत भारत की शर्तों पर होनी चाहिए। उससे दोस्ती के लिए बहुत ज्यादा उत्सुकता दिखाने की जरूरत नहीं है।

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मोदी बदल देंगे आधार योजना?

संघ यूपीए सरकार की ओर से शुरू की गई कुछ योजनाओं को लेकर सवाल खड़े करता रहा है। उसका मानना है कि यूपीए सरकार की आधार योजना के जरिये दूसरे देशों के अवैध प्रवासियों को पहचान और एक तरह से नागरिकता देने की कोशिश हो रही है।

माना जा रहा है कि हाल में संघ के नेताओं ने नरेंद्र मोदी और राजनाथ सिंह से इस स्कीम में संशोधन की अपील की है। संघ के नेताओं का कहना था कि अवैध अप्रवासियों खास कर बांग्लादेशी नागरिकों को भारत की वैध नागरिकता लेने से रोकने की जरूरत है।
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