कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने समलैंगिकता पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को अपना रुख जाहिर करने को कहा है।
भाजपा ने समलैंगिकता के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के फैसले का समर्थन किया है। उसने कहा है कि वह इस ‘अप्राकृतिक कृत्य’ का समर्थन नहीं कर सकती। लेकिन भाजपा के पितृ संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने इस पर अपना रुख जाहिर नहीं किया है। यही वजह है कि दिग्विजय सिंह ने संघ को इस मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ने की चुनौती दी है।
कांग्रेस महासचिव ने अपने ताजा ट्वीट में कहा है, 'हम आईपीसी की धारा 377 पर आरएसएस का आधिकारिक रुख जानना चाहते हैं।'
शुरू में भाजपा नेताओं ने समलैंगिकता के मुद्दे पर अपनी राय जाहिर करने से इनकार कर दिया था। लेकिन अब पार्टी के अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा है कि अगर सरकार इस मुद्दे पर कोई सर्वदलीय बैठक बुलाती है तो भाजपा समलैंगिकता पर प्रतिबंध लगाने वाली धारा 377 का समर्थन करेगी।
उन्होंने कहा है कि भाजपा धारा 377 का समर्थन करेगी क्योंकि हम मानते हैं कि समलैंगिकता एक ‘अप्राकृतिक कृत्य’ है और इसका समर्थन नहीं किया जा सकता।
इससे पहले जब यह सवाल लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और अरुण जेटली से पूछा गया था तो स्वराज ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने इसे पार्लियामेंट पर छोड़ दिया है। पार्लियामेंट चाहे तो सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बदल सकती है। सरकार चाहे तो सर्वदलीय बैठक बुला कर इस मामले पर सर्वसम्मति बना सकती है। बैठक में सरकार के प्रस्ताव को देखने के बाद ही हम कोई राय रखेंगे।