भगवा एजेंडे को अमल में लाने के लिए मोदी सरकार पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का दबाव बढ़ता जा रहा है। संघ ने अब केंद्र को अलग से गौ संवर्धन मंत्रालय बनाने का सुझाव दिया है। संघ ने सरकार से कहा है कि वह गौ पालन को बढ़ावा देने और भारतीय नस्ल की गायों का संवर्धन करने के लिए अलग से गौ संवर्धन मंत्रालय का गठन करे। वैसे गौ रक्षा को लेकर संघ और उसके सहयोगी संगठनों का अभियान हमेशा से चलता रहा है। बताया जा रहा है कि पूर्व भाजपा महासचिव गोविंदाचार्य ने इस मामले को लेकर संघ प्रमुख मोहन भागवत पर भी दबाव बनाया है। चंद दिनों पहले भागवत से मुलाकात कर गोविंदाचार्य ने उनसे सरकार पर दबाव बनाने का आग्रह किया था।
कहा जा रहा है कि संघ का सुझाव कृषि मंत्रालय को मिल गया है लेकिन मंत्रालय अभी हरकत में नहीं आ पाया है। मंत्रालय में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की तर्ज पर भारतीय पशु अनुसंधान परिषद (आईसीवीआर) के गठन का प्रयास चल रहा है। परंतु आईसीएआर के आला अधिकारी इसमें रोड़ा अटका रहे हैं।
हालांकि संघ के दबाव का एक परिणाम अभी से नजर आ रहा है कि कृषि मंत्रालय ने देशी गायों की नस्लों के संरक्षण को लेकर कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। गौ संवर्धन के भावी कदमों की रूपरेखा को लेकर इन दिनों एक दस्तावेज को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
संघ के जरिये सरकार पर दबाव बनाने के बाद गोविंदाचार्य ‘अभी देखो और इंतजार करो’ की नीति पर चल रहे हैं। मार्च तक सरकार की ओर से अलग से गौ संवर्धन मंत्रालय का गठन नहीं हुआ तो गोविंदाचार्य संघ के कुछ संगठनों को साथ लेकर सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरने की तैयारी में हैं।
बातचीत में गोविंदाचार्य ने स्वीकार किया है कि उन्होंने संघ प्रमुख से इस मामले में बातचीत कर पहल की शुरुआत की है। उन्होंने कहा कि बीते 7 नवंबर से कई लोग मिलकर इस प्रयास को आगे बढ़ा रहे हैं। मार्च में एक बड़ी बैठक कर भावी रणनीति को अंजाम दिया जाएगा।