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संघ को रास नहीं आई शिवराज की नमाजी टोपी

Mon, 12 Aug 2013 12:07 AM IST
नई दिल्ली/हरीश लखेड़ा
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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की नमाजी टोपी पहनना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को रास नहीं आई है।
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खासतौर पर शिवराज की मौजूदगी में नरेंद्र मोदी पर सिने अभिनेता रजा मुराद के कटाक्ष से भाजपा का एक वर्ग खासा नाराज है।

जबकि शिवराज की नमाजी टोपी पहने की कवायद को उनकी सेक्यूलर छवि को पुख्ता करने के साथ ही राष्ट्रीय राजनीति में छाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

संघ इस बात से नाखुश है कि वोट बैंक के लिए भाजपा के मुख्यमंत्री भी कांग्रेस व अन्य दलों की राह पर चल रहे हैं।

वैसे तो प्रधानमंत्री रहते हुए अटल बिहारी वाजपेयी भी ईद पर कई दफा नमाजी टोपी व साफा ओढ़ते रहे हैं लेकिन भाजपा के मुख्यमंत्री इस तरह के प्रचार तंत्र से दूर ही रहे हैं।

मोदी से पहले उमा भारती भी मुख्यमंत्री रहते हुए पुराने भोपाल में एक मौलवी को हरा साफा पहनाने से साफ इंकार कर चुकी थीं।

उमा ने मौलवी से तब साफ तौर पर कह दिया था कि जब हम भगवा पहनाने की कोशिश नहीं करते है तो आपको भी नमाजी टोपी या हरा साफा पहनाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
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उमा ने रजा मुराद की टिप्पणी के बाद भी यही बात दोहराई थी।

बहरहाल, मुख्यमंत्री रहते हुए कल्याण सिंह ने भी नमाजी टोपी कभी नहीं पहनी। मोदी ने तो मौलवी को साफ इंकार कर दिया था, जबकि शिवराज ने खुद नमाजी टोपी पहन ली।

माना जा रहा है कि मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर उन्होंने मुसलिम समुदाय को रिझाने के लिए ऐसा किया क्योंकि प्रदेश में तीसरी बार सत्ता पाने पर वे भी मोदी के समकक्ष खड़े हो जाएंगे।

पार्टी के भीष्म पितामह लालकृष्ण आडवाणी तो लगातार शिवराज की तारीफों के पुल बांधते रहे हैं। कृषि क्षेत्र में लगभग 15 फीसदी जीडीपी लाकर शिवराज पहले ही राष्ट्रीय राजनीति में अपनी धाक जमा चुके हैं। अब नमाजी टोपी पहनकर उन्होंने अपनी सेक्यूलर छवि को और पुख्ता कर दिया है।
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साफ है कि तीसरी बार सत्ता में वापसी को लेकर आश्वस्त शिवराज की राष्ट्रीय राजनीति में छाने की उत्कंठा हिलोरे मारने लगी हैं।

उनकी मौजूदगी में मोदी पर साधा गया निशाना एक वाकया मात्र नहीं है, बल्कि बीते महीनों में मोदी के मुकाबले शिवराज की अपनी सेक्यूलर इमेज को उभारने की कोशिश का हिस्सा है।
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