भूमि अधिग्रहण अध्यादेश को लेकर मोदी सरकार के सामने पैदा संकट अभी टला भी नहीं है कि संघ ने बजट में नई सोच को लेकर उस पर दबाव बना दिया है। संघ का कहना है कि आम बजट पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की आर्थिक सोच के बजाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच जैसा होना चाहिए।
आम जनता के लिए मुफ्त और सस्ती दवा की मांग करते हुए संघ के संगठनों ने सरकार से स्वास्थ्य खर्च को जीडीपी के 1.2 फीसदी से बढ़ाकर 2.5 प्रतिशत करने को कहा है। विदेशी निवेश पर श्वेत पत्र की मांग करते हुए ई-कॉमर्स कंपनियों पर रोक लगाने की मांग की गई है। संघ का कहना है कि औद्योगिक घरानों को ढेरों छूट देने के बजाय सरकार गरीब और किसानों पर ध्यान दें।
संघ से जुड़े संगठनों भारतीय मजदूर संघ, स्वदेशी जागरण मंच, भारतीय किसान संघ और उससे जुड़े आर्थिक विचारकों ने बजट पूर्व परिचर्चा में सरकार से कहा है कि बजट सरकार की नीति का प्रतिबिंब होता है। इसलिए बजट में मोदी सरकार को अपनी सोच और समझ दिखानी चाहिए, जिससे कि यह संदेश जाए कि निजाम बदल गया है।