सरकार और भाजपा में लगातार बढ़ते जा रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रभाव के बावजूद राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ पार्टी पर अपनी पकड़ ढीली नहीं पड़ने देना चाहता है।
शायद यही कारण है कि रक्षाबंधन पर्व मनाने के बहाने संघ ने पार्टी सांसदों को विचारधारा की घुट्टी पिलाने का निर्णय लिया है। इसके तहत संघ में नंबर दो की हैसियत रखने वाले भैयाजी जोशी 14 अगस्त को भाजपा के दोनों सदनों के सांसदों के साथ बैठक करेंगे।
यह बैठक संसदीय कार्यमंत्री वेंकैया नायडू के निवास पर होगी। भाजपा ने अपने सांसदों को न केवल हर हाल में बैठक में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है, बल्कि उस दिन सफेद कुर्ता-पायजामा और सिर पर संघ की चिरपरिचित काली टोपी पहनकर आने के लिए भी कहा है।
सूत्रों के अनुसार सांसदों की बैठक में उपस्थिति सुनिश्चित कराने के लिए राज्यवार सांसदों की ही टीम बनाई गई है। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उपस्थित रह सकते हैं। भाजपा में ऐसा शायद ही होता है जब संघ का कोई बड़ा नेता सीधे पार्टी सांसदों के साथ बैठक करे।
सांस्कृतिक और राजनीतिक एजेंडे बताएंगे
संघ पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के माध्यम से ही अपनी बात रखता आया है। भाजपा सूत्रों के मुताबिक भैयाजी के साथ भाजपा सांसदों की बैठक 14 अगस्त को सुबह 7.30 से 8.30 तक होगी।
पार्टी ने सांसदों को बैठक में हर हाल में उपस्थित रहने का निर्देश देने के साथ ही सांसदों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने के लिए अलग अलग राज्यों की जिम्मेदारी भी सांसदों की टीम को सौंपी है।
मसलन उत्तर प्रदेश का जिम्मा सांसद कमलेश पासवान, लल्लू सिंह, महेश शर्मा, रमाशंकर कथेरिया और राजेंद्र अग्रवाल को सौंपा गया है। जोशी इस बैठक में सांसदों को न केवल संघ की विचारधारा से परिचित कराएंगे, बल्कि संघ के सांस्कृतिक और राजनीतिक एजेंडे को भी बताएंगे।
भाजपा सांसदों को 15 अगस्त तक किसी भी सूरत में दिल्ली न छोड़ने और स्वतंत्रता दिवस पर लालकिले पर आयोजित समारोह में हर हाल में शिरकत करने का निर्देश भी जारी किया गया है। पीएम के तौर पर मोदी पहली बार लालकिले पर तिरंगा फहराएंगे।
कोई मौका नहीं चूकना चाहता संघ
अपने दम पर बहुमत का सपना पूरा होने के बाद संघ अब अपनी विचारधारा संबंधी एजेंडे को पूरा कराने के लिए तत्पर हो गया है। चूंकि इससे पूर्व वाजपेयी सरकार के दौरान संघ अपना एजेंडा पूरा नहीं कर पाया था, इसलिए इस बार वह कोई मौका नहीं चूकना चाहता।
संघ सूत्रों का कहना है कि चूंकि उस समय भी पार्टी के वाजपेयीमय हो जाने के कारण ऐसी स्थिति पैदा हुई। इसलिए इस बार संघ पार्टी और सरकार को मोदीमय होने से बचाना चाहता है।
यही कारण है कि आम चुनाव के नतीजे आने के बाद भले ही पार्टी इस जीत का श्रेय लगातार मोदी को दे रही है, मगर संघ प्रमुख मोहन भागवत समेत संघ के अन्य नेता इसे पार्टी और जनता की जीत करार दे रहे हैं।
इसी रणनीति के तहत अब तक अघोषित रूप से भाजपा की गतिविधियों में दखल देते रहे संघ ने खुलकर गतिविधियों में दखल देने की शुरुआत की है। इस कड़ी में जहां उसने पहली बार अपने सार्वजनिक चेहरा रहे राम माधव को भाजपा में भेजा है।
वहीं संगठन में पकड़ मजबूत कराने के लिए संगठन में अपने लोगों की संख्या बढ़ाने पर भी उसका जोर है।