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आरक्षण पर RSS चीफ भागवत की सलाह, गरमाई सियासत

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आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि आरक्षण का लाभ उठाने वालों का फैसला करने के लिए एक गैर राजनैतिक कमेटी बननी चाहिए। हरियाणा में जाट आरक्षण की मांग और इसकी जांच करने के लिए वेंकैया नायडू की अध्यक्षता में बनी कमेटी के संदर्भ में भागवत का यह बयान आया है।
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भागवत ने यहां चैंबर ऑफ कॉमर्स के एक सत्र में कहा कि कई लोग आरक्षण मांग रहे हैं और मेरा मानना है कि एक ऐसी कमेटी आरक्षण के लिए जरूरी योग्यता का फैसला करे, जो गैर राजनैतिक हो।

इसमें ऐसे लोग हों जिनका कोई निजी स्वार्थ न हो। उन्होंने कहा कि समाज में किस वर्ग को आगे लाया जाए या उसे कितने समय के लिए आरक्षण दिया जाए, इसके लिए एक समयबद्ध कार्यक्रम बने। इस कमेटी को इसे लागू करने का अधिकार मिले।
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'सामाजिक भेदभाव रहेगा तो आरक्षण का मुद्दा बरकरार रहेगा'

भागवत ने कहा कि सिर्फ किसी जाति में जन्म के आधार पर किसी को मौके से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। समाज में हर किसी को बराबरी का मौका मिलना चाहिए।

अगर लोगों को किसी खास जाति में जन्म लेने की वजह से  मौके नहीं मिलते हैं तो इस तरह की समस्या बनी रहेगी। उनका इशारा जाटों के आरक्षण को लेकर हरियाणा मे चल रहे हिंसात्मक आंदोलन की ओर था।

भागवत ने कहा कि आजादी के बाद बीआर अंबेडकर ने आर्थिक स्वतंत्रता और सामाजिक भेदभाव से आजादी की बात थी और जब तक समाज में भेदभाव रहेगा तब तक रिजर्वेशन का मुद्दा जिंदा रहेगा। चूंकि  हम शहर में रहते हैं इसलिए हमें जातिगत भेदभाव की समस्या का पता नहीं होगा लेकिन यह समस्या बरकरार है। इसलिए हर किसी को बराबरी का मौका मिलना चाहिए।
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