सिरकटी लाशों को तिहाड़ जेल के गेट के बाहर फेंकने के चर्चित मामले में सीरियल किलर चंद्रकांत झा को दिल्ली की रोहिण कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है। कोर्ट ने उसे तीन लोगों की हत्या का दोषी मानते हुए यह सजा दी है। उस पर सात लोगों की हत्या करने का आरोप था लेकिन सुबूत न होने के कारण उसे चार मामलों में बरी कर दिया गया था।
दरअसल 1998 में पश्चिमी दिल्ली के आदर्श नगर में सिरकटी लाश मिली थी, मृतक की पहचान मंगल उर्फ औरंगजेब के तौर पर हुई थी। पुलिस ने इस मामले में चंद्रकांत झा को गिरफ्तार किया था लेकिन वह 2002 में बरी हो गया। उसके बाद 2003, 2005, 2006 और 2007 में सिर कटी लाशें मिलीं।
चंद्रकांत झा पुलिस को चिढ़ाने के लिए सिर कटी लाशों को तिहाड़ जेल के गेट के बाहर फेंक देता था। 20 अक्टूबर 2006 को सुबह में तिहाड़ जेल के गेट नंबर 3 के सामने प्लास्टिक बैग में एक युवक अमित की सिरकटी लाश मिली, जिसमें हत्यारे ने पुलिस को खुली चुनौती दी थी कि वह उसे पकड़ कर दिखाए। 20 मई 2007 को पुलिस ने अलीपुर से चंद्रकांत झा को गिरफ्तार कर लिया। इस केस से ही यह मामला चर्चा में आया था। तब से चंद्रकांत झा जेल में है।
कोर्ट ने चंद्रकांत झा को अपने तीन सहयोगियों अनिल मंडल, दलीप व उपेंद्र की हत्या व सबूत मिटाने के आरोपों में दोषी करार दिया है। चंद्रकांत मूल रूप से बिहार के मधेपुरा जिला का रहने वाला है।