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बिना पड़ताल रॉबर्ट वाड्रा को डीसी की क्लीन चिट

Fri, 26 Oct 2012 11:09 PM IST
चंडीगढ़/अमर उजाला ब्यूरो
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सीलिंग एक्ट की धज्जियां उड़ाते हुए रॉबर्ट वाड्रा को फरीदाबाद, गुड़गांव, मेवात और पलवल के उपायुक्तों ने सरकार के पास अधूरी रिपोर्ट भेजकर क्लीन चिट दे दी है। उपायुक्तों की भेजी रिपोर्ट में वाड्रा या उनकी कंपनियों ने कितनी जमीन किस नाम से कितनी राशि से खरीदी है, यह जानकारी तो दी गई है, लेकिन वाड्रा या उनकी कंपनियों ने जमीन बेची या नहीं, यह जानकारी नहीं दी गई है।
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अतिरिक्त मुख्य सचिव राजस्व कृष्ण मोहन को मेवात के उपायुक्त ने 23 अक्तूबर 2012, पलवल और फरीदाबाद के उपायुक्तों ने 25 अक्तूबर 2012 को रिपोर्ट भेजकर कहा है कि स्टांप ड्यूटी या रजिस्ट्रेशन फीस में सरकार को कोई नुकसान नहीं हुआ है। गुड़गांव के उपायुक्त ने रिपोर्ट ही नहीं भेजी है।

उन्होंने 16 अक्तूबर 2012 को ही रिपोर्ट भेजकर जानकारी दी थी कि वाड्रा ने डीएलएफ को जो 3.5 एकड़ जमीन बेची थी, उसमें स्टांप ड्यूटी का कोई नुकसान नहीं हुआ था। रजिस्ट्री भी ठीक थी और इंतकाल भी सही था। उधर, हरियाणा सरकार के प्रवक्ता ने जारी बयान में कहा है कि चारों उपायुक्तों की रिपोर्ट के अनुसार राजस्व का कोई नुकसान नहीं हुआ है।
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उपायुक्तों ने जो विवरण नहीं दिया
‘अमर उजाला’ के पास उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार पलवल के उपायुक्त ने तो हसनपुर गांव में रॉबर्ट वाड्रा के नाम खरीदी गई 72 कनाल सैलाब जमीन खरीदने की बात रिपोर्ट में लिख दी मगर रियल अर्थ और स्काई लाइट के नाम खरीदी गई जमीन का ब्योरा नहीं लिखा।

फरीदाबाद के उपायुक्त ने खरीदी जमीन का विवरण तो दिया मगर वाड्रा ने दिसंबर-2010 में बेची जा चुकी इस जमीन का विवरण नहीं दिया। प्रियंका गांधी के नाम पर 28 अप्रैल-2006 को अमीरपुर गांव में 5 एकड़ जमीन खरीदी दिखाई गई है। मेवात के उपायुक्त ने शकरपुर गांव में रियल अर्थ के नाम पर खरीदी गई जमीन का विवरण दिया मगर 2011 में बेची गई जमीन का विवरण नहीं दिया।

यह था खेमका का आदेश
तत्कालीन महानिदेशक चकबंदी डा. अशोक खेमका ने 12 अक्तूबर को चारों उपायुक्तों को निर्देश दिया था कि रॉबर्ट वाड्रा या उनकी कंपनियों के नाम खरीदी या बेची गई जमीन की रजिस्ट्रियों की जांच करें। यह पता लगाएं कि कहीं जमीन की कीमत कम तो नहीं लगाई गई जिससे राजस्व का नुकसान हुआ हो। ऐसी सभी रजिस्ट्रियों की सूची महानिदेशक चकबंदी कार्यालय भेजें ताकि उनकी जांच हो सके।

मैंने उपायुक्तों की रिपोर्ट नहीं देखी है। अलबत्ता, मैंने वाड्रा की सभी रजिस्ट्रियों की सूचना मांगी थी, फिर भी अगर कोई राजस्व का नुकसान नहीं हुआ है तो यह अच्छी बात है। मेरे आदेशों पर जांच कमेटी गठित करने का कोई औचित्य नहीं है। अगर किसी को तकलीफ है तो वह हाईकोर्ट जाए।--डॉ. अशोक खेमका, तत्कालीन महानिदेशक चकबंदी, हरियाणा

मुझे यह जानकारी नहीं है कि गुड़गांव जिले में रॉबर्ट वाड्रा या उनकी कंपनी के नाम कितनी जमीन है। मगर सरकार को कोई राजस्व नुकसान नहीं हुआ है।-पीसी मीणा, उपायुक्त, गुड़गांव

हां, सरकार को भेजी रिपोर्ट में गलती से यह विवरण नहीं दिया गया कि वाड्रा या उनकी कंपनी ने जमीन बेच दी है या नहीं। यह संशोधित रिपोर्ट भेजी जाएगी।--बलराज सिंह, उपायुक्त, फरीदाबाद

मैंने शकरपुर गांव में वाड्रा की रियल अर्थ कंपनी द्वारा बेची जा चुकी जमीन का विवरण सरकार को नहीं भेजा। सिर्फ खरीदी गई जमीन का विवरण भेजा है।--वजीर सिंह गोयत, उपायुक्त, मेवात
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