लोकसभा चुनावों से ऐन पहले बिहार की राजनीति में अचानक उबाल आ गया है। देश की सियासत में अहम जगह रखने वाले इस सूबे से बीते दो-तीन दिन से बड़े राजनीतिक बदलाव की खबर आ रही थी।
लेकिन सोमवार शाम होते-होते एक ऐसी खबर आई, जिसने राष्ट्रीय जनता दल सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के होश उड़ा दिए होंगे। यह दो दिन के अंतराल पर दूसरा झटका है।
रविवार को उनके पुराने साथी रामविलास पासवान की पार्टी एलजेपी के नेताओं ने इस बात के संकेत दिए कि भाजपा के साथ गठबंधन को लेकर बातचीत जारी है और जल्द ही इस बारे में औपचारिक ऐलान किया जा सकता है, लेकिन लालू पर असली बम सोमवार को गिरा।
13 विधायकों ने साथ छोड़ा?
सोमवार शाम खबर आई कि लालू यादव की राष्ट्रीय जनता दल में फूट पड़ गई है। पार्टी के 13 विधायकों ने राज्यपाल को चिट्ठी लिखकर अलग गुट के रूप में मान्यता देने का आग्रह किया है।
बिहार विधानसभा में आरजेडी के कुल 22 विधायक हैं और 13 विधायकों के टूटने की खबर में अगर दम है, तो लालू यादव के लिए अब तक की सबसे बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है और इस खबर में वाकई दम दिख रहा है।
यह बगावत आरजेडी विधायक सम्राट चौधरी की अगुवाई में हुई है। सम्राट ने कहा, "13 विधायक हमारे साथ हैं। बिहार में आरजेडी की जो लड़ाई है, वो धीमी पड़ती जा रही है। आरजेडी कांग्रेस की बी टीम बन गई है और उसकी गोद में खेल रही है।"
'निकल चुका है लालू यादव का वक्त'
सम्राट चौधरी ने कहा, "लालू यादव दिल्ली में बैठकर आरजेडी को साफ करने का काम कर रहे हैं। जिन्होंने लालू को जेल भेजा, अध्यादेश फाड़ा, उसी कांग्रेस के साथ वो जाकर मिल गए हैं।"
इन 13 विधायकों में पांच मुस्लिम और तीन यादव विधायक शामिल बताए जाते हैं। बागी विधायकों में चंद्रशेखर, दुर्गाप्रसाद, ललित यादव, जितेंद्र राय, अनिरुद्ध यादव, राम लखन राम रमन, जावेद इकबाल, अख्तर अल इस्लाम, राघवेंद्र प्रताप, डॉ. फय्याज शामिल बताए जाते हैं।
सम्राट के साथ मौजूद जावेद ने कहा, "हर चीज का वक्त होता है। लालू यादव का भी वक्त था, जो अब निकल चुका है। उन्होंने जब आडवाणी का रथ रोका था, तो इसी बात पर बिहार की जनता ने बीस साल उन्हें कुर्सी सौंपी।"
लालू बोले, खबर में सब कुछ सच नहीं
लालू यादव के लिए यह दोहरा झटका है। इससे पहले खबर आई थी कि रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी आगामी लोकसभा चुनावों में कांग्रेस-आरजेडी नहीं, बल्कि भाजपा से हाथ मिला सकती है।
और इसके तुरंत बाद पता चला कि आरजेडी में फूट पड़ गई है। इन दोनों मुद्दों पर लालू ने कहा, "एलजेपी के बारे में हमने सुना है। हम उम्मीद करते हैं कि वो हमारे ही साथ आएंगे। देश को सांप्रदायिक ताकतों से बचाना जरूरी है और इसके लिए सभी को मिल जाना चाहिए।"
जब पार्टी में फूट के बारे में सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा, "हां हमने भी कुछ ऐसा सुना है फूट के बारे में। लेकिन जो कुछ आप लोगों ने सुना है, वो पूरा सच नहीं है।"
कांग्रेस ने बताया जेडीयू-भाजपा की साजिश
बिहार की राजनीति में तेजी से बदलाव आया है। पहले कहा जा रहा था कि आरजेडी नेता अब्दुल बारी सिद्दकी की अगुवाई में टूट हो सकती है, लेकिन जो विधायक अलग हुए हैं, उनमें उनका नाम नहीं है।
कांग्रेस ने इसे जेडी-यू और भाजपा की साजिश बताया है। कांग्रेस प्रवक्ता प्रेमचंद मिश्रा ने कहा, "कांग्रेस का किसी से गठबंधन नहीं था। पहले चुनावों में आरजेडी-एलजेपी मिलकर लड़े थे। ये सब जेडीयू, भाजपा कर रहे हैं, ताकि आरजेडी कमजोर हो जाए। यह नीतीश कुमार का काम है और बीजेपी के लोग भी इसमें शामिल हैं।"
ऐसा कहा जा रहा था कि जेल से वापसी के बाद लालू को सहानुभूति का फायदा हो सकता है, लेकिन जानकार यह भी कह रहे हैं कि लालू भले ऊपर से मजबूत दिख रहे हों, लेकिन भीतर ही भीतर उन्हें पता है कि पार्टी के नीचे से जमीन खिसक रही है।
जदयू में शामिल होंगे असंतुष्ट विधायक!
वहीं, राजद में मची अफरातफरी से जनता दल यूनाइटेड के नेता बेहद खुश दिख रहे हैं।
जदयू के केसी त्यागी ने कहा कि भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी का रथ रोकना बेहद जरूरी है। ऐसे में नाराज विधायकों का पार्टी में स्वागत है। सभी लोग मिलकर ही बीजेपी की सांप्रदायिकता राजनीति को रोक सकते हैं।
13 विधायकों को अलग गुट की मान्यता
इधर, बिहार विधानसभा के अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी ने राजद के असंतुष्ट 13 विधायकों को बतौर एक अलग गुट की मान्यता दे दी है। इस संबंध में विधानसभा सचिव ने अधिसूचना जारी कर दी है।
वहीं छह असंतुष्ट विधायकों का कहना है कि वे अभी भी राष्ट्रीय जनता दल के ही साथ हैं। विधायकों का दावा है उनलोगों का गलत तरीके से हस्ताक्षर लिया गया।
ललित यादव, दुर्गा प्रसाद सहित कुछ विधायकों ने मीडिया को बताया कि उनकी राजद छोड़ने की खबर गलत है।