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टीईटी के लिए एससीईआरटी से मांगा संशोधित प्रस्ताव

Sun, 30 Dec 2012 11:32 AM IST
लखनऊ/अमर उजाला ब्यूरो
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राज्य सरकार इस बार शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) आयोजित कराने को लेकर फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। नवंबर 2011 में आयोजित टीईटी की गड़बड़ियों को देखते हुए इस बार सारी खामियां दूर कराने की मशक्कत चल रही है।
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बेसिक शिक्षा मंत्री रामगोविंद चौधरी स्वयं इस पर नजर रखे हुए हैं। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) से पुन: संशोधित प्रस्ताव मांगा गया है। बेसिक शिक्षा मंत्री ने कहा है कि संशोधित प्रस्ताव में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि परीक्षा में किसी तरह की कमी न रहने पाए।

टीईटी की जिम्मेदारी परीक्षा नियामक प्राधिकारी को दी गई है, इसलिए इसमें ऐसे अधिकारियों की तैनाती दी जाए जिससे गड़बड़ी की संभावना न रहे। एससीईआरटी से एक सप्ताह के अंदर प्रस्ताव देने को कहा गया है।
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राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने शिक्षकों की भर्ती के लिए टीईटी अनिवार्य कर दिया है। राज्य सरकार को साल में दो बार टीईटी आयोजित करानी है। उत्तर प्रदेश में पहली बार नवंबर 2011 में टीईटी आयोजित कराई गई। इसमें गड़बड़ी के आरोप में तत्कालीन माध्यमिक शिक्षा निदेशक संजय मोहन को गिरफ्तार कर लिया गया।

राज्य सरकार वर्ष 2011 की परीक्षा में हुई गड़बड़ी की डर से वर्ष 2012 में टीईटी आयोजित नहीं कर सकी। एससीईआरटी से टीईटी कराने के लिए कई बार प्रस्ताव मांगे गए, लेकिन हर बार इसमें कुछ न कुछ संशोधन कराया गया।

शासन स्तर पर हुई बैठक में फरवरी 2013 में टीईटी आयोजित कराने की तैयारी थी, लेकिन विचार-विमर्श के दौरान यह तय किया गया कि परीक्षा नियामक प्राधिकारी में कुछ अच्छे अधिकारियों को तैनात करने के बाद ही टीईटी आयोजित कराई जाए। एससीईआरटी से इसके आधार पर ही प्रस्ताव मांगा गया है।
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