राजधानी के इतिहास में पहली बार अपनी मांग को लेकर दिल्ली सरकार के केंद्र सरकार के खिलाफ धरने पर बैठने के बाद आखिरकार तुम्हारी भी जय-जय और हमारी भी जय-जय का फॉर्मूला दोनों को रास आ गया।
पुलिसकर्मियों के खिलाफ निलंबन की मांग करने वाले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इसके बाद कम से कम तबादले की मांग की थी लेकिन अब उपराज्यपाल की अपील पर वे थाना प्रभारी (एसएचओ) और पीसीआर इंचार्ज की छुट्टी पर ही मान गए।
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कानून मंत्री से दुर्व्यवहार के आरोपी ठहराए बताए जा रहे एसीपी पर कोई कार्रवाई की बात इस अपील में नहीं है।
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इस बार जनता ने नहीं दिया साथ
दरअसल, इस धरने से मेट्रो स्टेशनों के बंद होने तथा मंत्रालयों व सरकारी कार्यालयों के रास्ते बंद होने पर लाखों लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
इस कारण से मुख्यमंत्री के दिल्ली पुलिस व केंद्र सरकार के खिलाफ चल रहे धरने को अपेक्षित रेस्पॉन्स उस जनता की तरफ से नहीं मिल रहा था जिसने नया प्रयोग करते हुए आप को वोट किया था।
केजरीवाल को सरकार बनने से पहले मिल रहे समर्थन जैसा माहौल भी इस आंदोलन में मिलता नहीं दिख रहा था।
बैकफुट पर दिखे आप के रणनीतिकार
धरना स्थल व बैरिकेड्स पर कार्यकर्ताओं की संख्या सैकड़ों तक ही सिमटी थी। सूत्रों के अनुसार आगामी लोकसभा चुनावों में जुटी आप के रणनीतिकार इस कड़ी में इस धरने का समाधान खोजने में जुटे थे।
इस बीच विपक्ष ने भी आप को सरकार के धरने को कठघरे में खड़ा करना शुरू कर दिया।
दूसरी ओर भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घिरी कांग्रेस को मुख्यमंत्री ने गृह मंत्री पर सीधे आरोप लगाकर परेशानी में डाल दिया। उन्होंने कहा था कि एसएचओ के तबादलों का पैसा जमा होकर गृह मंत्री तक पहुंचता है।
पहले ही दिल्ली चुनाव में जबर्दस्त झटका खा चुकी कांग्रेस भी इस मसले को केजरीवाल के धरने पर बैठने के बाद जल्द सुलझाना चाहती थी।
बताया जाता है कि इस संबंध में विधायक शोएब इकबाल बीच का रास्ता लेकर दोपहर के समय धरना स्थल पर पहुंचे थे। इसके बाद एलजी की अपील का पत्र आया, जिसमें दो अधिकारियों को छुट्टी पर जाने भेजने की बात कही गई।
सूत्रों के अनुसार दोनों ही दलों से जुड़े राजनैतिक पंडितों ने यह बीच का रास्ता तैयार किया। इन लोगों का मानना था कि इस विवाद में भाजपा कहीं नहीं आ रही है।
ऐसे में मिशन 2014 के तहत मोदी को प्रधानमंत्री बनाने की कोशिश में जुटी भाजपा इसका लाभ उठा सकती है। फिलहाल इस विवाद पर उसने आप व कांग्रेस के गठजोड़ पर राजनीति बाण चलाने तेज कर दिए थे।
राजधानी में यह चर्चा बनी रही कि दो दिन के धरने में सिर्फ दो अधिकारियों को छुट्टी पर भेजने में कामयाबी मिली। हालांकि इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों को छुट्टी पर भेजने को लेकर भी मुख्यमंत्री ने इसे अपनी जीत ही बताया है।