नरेंद्र मोदी की हुंकार रैली में हुए धमाकों में इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) के नए मास्टरमाइंड तहसीन अख्तर उर्फ मौनू ने झारखंड मॉड्यूल के सदस्यों से अमोनियम नाइट्रेट की जगह पोटेशियम नाइट्रेट का इस्तेमाल करवाया।
अमोनियम नाइट्रेट की खरीद बिक्री पर सुरक्षा एजेंसियों की पैनी नजर के चलते यह फैसला लिया गया। पोटेशियम नाइट्रेट बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में खाद के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। लिहाजा इसकी आसान उपलब्धता ने इस रासायनिक पदार्थ की तरफ पटना धमाके के मास्टरमाइंड का ध्यान खींचा।
सूत्रों के मुताबिक हालांकि आतंकियों ने अपनी तरफ से काफी होशियारी की, लेकिन बम के सर्किट में खामियां रह गईं। यही वजह है कि रखे गए पंद्रह बमों में सात बम नहीं फटे।
मामले की जांच में जुटे बिहार पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने अमर उजाला से फोन पर हुई बातचीत में बताया कि हालांकि पोटेशियम नाइट्रेट अमोनियम नाइट्रेट की तुलना में कमजोर रासायन है।
लेकिन आतंकियों ने बमों में इसका इस्तेमाल काफी सोच समझ कर किया है। अगर बम में अमोनियम नाइट्रेट का इस्तेमाल किया गया होता तो धमाकों का असर ज्यादा भयानक होता।
भीड़ में भगदड़ मचा था मकसद
बमों की जांच से पता चला है कि आतंकियों ने लोहे की मोटी पाइप में पोटेशिम नाइट्रेट भरकर उसे आईईडी और इलेक्ट्रानिक टाइमर के जरिए विस्फोट कराया। उनका मकसद था कि अगर विस्फोट से लोगों की जान नहीं ले सकते तो कम ताकत से धमाके कर भीड़ में भगदड़ मचा दें। आतंकियों का मानना था कि भगदड़ से भी काफी मौतें होंगी।
एनआईए के अधिकारी के मुताबिक इस आपरेशन में तहसीन ने कम से कम पंद्रह लड़कों की टीम बनाई थी। तहसीन जुलाई 2011 के मुंबई ब्लास्ट और इस साल फरवरी के हैदराबाद ब्लास्ट का आरोपी भी है। एनआईए ने तहसीन पर 10 लाख का इनाम घोषित कर रखा है। उसे पटना धमाकों में भी आरोपी बनाया जाएगा।
भटकल ने दी तहसीन को ट्रेनिंग
एनआईए के सूत्रों के मुताबिक गिरफ्तार आईएम मास्टरमाइंड यासीन भटकल ने तहसीन को 2009 के आखिर में आईएम में भर्ती किया था। उसकी मुलाकात समस्तीपुर में कुछ धार्मिक तकरीरों के दौरान हुई थी।
दिमाग के तेज तर्रार तहसीन को भटकल ने बम बनाने के साथ सुरक्षा तंत्र को चकमा देने और संगठन को मजबूत करने में पारंगत किया। उसी ट्रेनिंग का नतीजा है कि भटकल की गैरमौजूदगी में तहसीन ने इतने बड़े ऑपरेशन को अंजाम दे दिया। भटकल ने ताजा पूछताछ में बताया है कि उसकी गिरफ्तारी से पहले पटना धमाके की योजना नहीं बनी थी। यह तहसीन के अपने दिमाग की उपज है।