अदालत की फाइल में कथित रूप से भगोड़ा घोषित कर दिए गए व्यक्ति को आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट का जज नियुक्त किए जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। जस्टिस एनवी रमन्ना की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर अदालत ने सुनवाई पूरी कर ली। याचिका में कहा गया है कि ट्रायल कोर्ट के रिकॉर्ड में भगोड़ा घोषित कर दिए गए रमन्ना को राजनीतिक दबाव के चलते जज नियुक्त किया गया है।
जस्टिस आफताब आलम और जस्टिस रंजना देसाई की पीठ ने जस्टिस रमन्ना की नियुक्ति के खिलाफ एम मनोहर रेड्डी की जनहित याचिका पर सुनवाई पूरी की। याचिका में कहा गया है कि जस्टिस रमन्ना न्यायाधीश के पद पर नियुक्ति के समय भगोड़े थे। 1981 में दंगा करने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में उन्हें भगोड़ा घोषित किया गया था। नागार्जुन विश्वविद्यालय में छात्र रहते हुए उनके खिलाफ यह मुकदमा दर्ज किया गया था। ट्रायल कोर्ट की ओर से जारी गैर-जमानती वॉरंट तामील न होने पर उन्हें अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा के तहत भगोड़ा घोषित कर दिया गया था।