सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि छोटी सी बातों को लेकर सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के लोगों को नौकरी के मिलने वाले आरक्षण से महरूम नहीं किया जा सकता। शीर्ष अदालत ने कहा है कि सदियों से प्रताड़ित और अभावग्रस्त लोगों के साथ ऐसा करना उचित नहीं है। ऐसा करना सरकारी नौकरी में असमानता खत्म करने की परिकल्पना के खिलाफ है।
न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर और न्यायमूर्ति वी गोपाल गौड़ा की पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को दरकिनार कर दिया है जिसमें एक व्यक्ति को दिल्ली सरकार के अस्पताल में नियुक्ति देने से सिर्फ इसलिए इनकार कर दिया गया था कि वह वक्त पर अपना ओबीसी सर्टिफिकेट जमा करने में असफल रहा था।
पीठ ने हाईकोर्ट के आदेश को गलत बताते हुए कहा कि आरक्षण का संवैधानिक सिद्धांत न केवल संविधान की प्रस्तावना में है, बल्कि मूल अधिकारों (अनुच्छेद-14,15,16) और राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (अनुच्छेद-39ए) में निहित है। इसके तहत समाज के हर वर्ग को समान अवसर मिलने की बात कही गई है।