देश के विकास में अहम योगदान देने वाले पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की जन्मभूमि रामेश्वरम के पूर्ण विकास की हसरत अधूरी रह गई। लोकसभा चुनाव से कुछ समय पहले एक छोटे सी लाइब्रेरी का उद्घाटन करते हुए कलाम ने रामेश्वरम के विकास पर चिंता जताई थी कि इस जगह का विकास उतना नहीं हो पाया है जितना की होना चाहिए।
उन्होंने उपस्थित जनसमूह से कहा कि रामेश्वरम में और विकास करने की जरूरत है। कलाम के परिवार के करीबी माने-जाने वाले भाजपा राष्ट्रीय कार्यसमिति के सदस्य के मुरलीधरन पूर्व राष्ट्रपति के पैतृक शहर रामेश्वरम के वाशिंदे हैं। उनका घर कलाम के पैतृक घर से महज 400 मीटर की दूरी पर है।
दोनों परिवारों के बीच लगभग 50 वर्षों पुराना गहरा संबंध है। मुरलीधरन बताते हैं कि उनके पिता और कलाम के पिता के बीच गहरी दोस्ती थी। राष्ट्रपति पद की शपथ लेने से पहले कलाम रामेश्वरम मंदिर में गए थे।
लेकिन मंदिर में नियम है कि एक खास जगह के बाद गैर हिंदू आगे दर्शन के लिए नहीं जा सकता। जिला प्रशासन और मेरे खुद के आग्रह के बावजूद कलाम ने उस मर्यादा का पालन किया।
यही नहीं उन्होंने अपने सहयोगियों और सुरक्षाकर्मियों से कहा कि वे जाकर दर्शन करके आएं। जब तक कलाम के सहयोगी स्टाफ और सुरक्षाकर्मी दर्शन करके वापस नहीं आए। तब तक कलाम उसी जगह रुककर इंतजार करते रहे।
देश के लिए रहे कुंआरे
कलाम के कुंवारे रहने के राज पर मुरलीधरन का कहना है कि उनके परिवार की माली हालत बेहद खराब थी। कलाम ने पहले अपने परिवार के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के प्रयास में शादी में विलंब किया।
जब शादी में विलंब हो गया, तो उन्होंने तय किया कि अब तक परिवार के स्तर को ऊपर उठाने के लिए शादी नहीं की, तो अब देश के स्तर को उठाने के लिए कुंवारा रहूंगा।
थके होने के बाद भी मिले
भाजपा राष्ट्रीय कार्यसमिति के सदस्य के मुरलीधरन के मुताबिक कलाम गरीब-अमीर, छोटे एवं बडे़ नेता के बीच में भेद नहीं करते थे। एकबार वे एक शादी समारोह में शामिल होने रामेश्वरम आए थे। विवाह में व्यस्तता की वजह से शाम को काफी थक गए थे।
सुरक्षाकर्मियों से कहा कि था कि कोई भी आए तो मिलने के लिए मना कर देना, लेकिन मैं पहुंच गया था। सुरक्षाकर्मियों ने कलाम की बात बताई। तो मैं जाने लगा था।
तभी ऊपर से परिवार के व्यक्ति की नजर मुझ पर पड़ी। उन्होंने अंदर आने को कहा। कलाम को परिवार के लोगों ने बताया कि मैं मिलने आया हूं। वे बेहद थके थे। बावजूद उसके उन्होंने अपने पास बुलाया और सबसे कहा कि ये भाजपा वाले अपने हैं।
बच्चों को खुद पूरा राष्ट्रपति भवन दिखाया
कलाम इतने सहज थे कि उन्होंने राष्ट्रपति पद की शपथ वाले दिन समारोह में शामिल होने गए भाई एवं परिवार के लोगों को उसी दिन वापस रामेश्वरम भेज दिया।
रामेश्वरम लौटते वक्त उनके भाई के साथ मैं भी था। पत्रकारों ने कलाम के भाई से सवाल दागा कि आप आज ही वापस क्यों लौट आए। उनके भाई का जवाब था कि कलाम ने वापसी का टिकट शपथ ग्रहण के शाम के दिन का करवाकर भेजा था।
रामेश्वरम के हर बच्चे का वे ख्याल रखते थे। राष्ट्रपति बनने के बाद रामेश्वरम के स्कूली बच्चे उनसे मिलने गए थे। खुद कलाम ने अपने साथ लेकर सभी बच्चों को पूरा राष्ट्रपति भवन दिखाया। उसके बाद खुद सबको भोजन करवाया, जिससे बच्चे उनके और कायल हुए।