बांबे हाईकोर्ट का मानना है कि एक बच्चे पर धर्म को जबरन थोपा नहीं जा सकता है। इसी को आधार मानते हुए हाईकोर्ट ने एक ईसाई पिता और हिंदू मां की तीन वर्षीय बच्ची की रोमन कैथोलिक के तौर पर परवरिश करने के लिए कस्टडी देने की एक याचिका को खारिज कर दिया।
यह याचिका ईसाई पिता के परिवार ने दाखिल की थी। बच्ची के पिता ने पत्नी की चाकू घोंपकर हत्या कर दी थी। इस अपराध में वह जेल की सजा काट रहा है। पिता के परिवार और बच्ची के नाना ने उसकी कस्टडी का जिम्मा लेने के लिए याचिकाएं दाखिल की थीं।
पिता और बुआ ने अपनी याचिका में कहा था कि वह बच्ची की परवरिश रोमन कैथोलिक ढंग से करना चाहते हैं। उनका कहना था कि कैथोलिक रस्में पूरी की जानी चाहिए और उसकी पढ़ाई कान्वेंट स्कूल में होनी चाहिए जहां वह ईसाई धर्म के आदर्शों के बारे में सीख सकेगी।
जस्टिस रोशन दलवी ने अपने आदेश में कहा कि बच्ची का ईसाई पिता अपनी पत्नी की हत्या के अपराध में जेल में बंद है। ऐसे में वह बच्ची के लिए आदर्श नहीं हो सकता है। दलवी ने पिता के पक्ष के इस तर्क को खारिज कर दिया कि बच्ची पर उक्त व्यक्ति का धर्म ही लागू होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बच्ची पर कोई धर्म थोपा नहीं जा सकता है और धर्म के मत से उसे दूर रखना ही उसके हित में होगा। कोर्ट ने कहा कि बच्ची अपने नाना नानी के परिवार में घुल-मिल चुकी है। इसीलिए उसका संरक्षण उन्हें ही देना उचित होगा।