पूर्व आर्मी चीफ जनरल वीके सिंह ने देश चलाने वालों को खरी-खरी सुनाई है। उन्होंने कहा कि देश को कैंसर है, लेकिन दवा टाइफाइड की दी जा रही है। आज प्रजातंत्र ‘इलेक्ट्रोकेसी’ बन गया है और शासन ‘चोरों का, चोरों द्वारा और चोरों के लिए‘ हो गया है।
जनरल वीके सिंह ने कहा कि नक्सल समस्या के लिए सरकारी नीतियों जिम्मेदार हैं। जनरल सिंह ने ये बातें जयपुर में सोमवार को आयोजित एक कार्यक्रम में कही। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते नक्सल प्रभावित इलाकों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में स्थिति और बदतर हो सकती है।
सेमिनार में जनरल वीके सिंह ने कहा कि उन्होंने नक्सल प्रभावित इलाकों में सेना भेजे जाने की जोरदार मुखालफत की थी। एक घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जब वो आर्मी चीफ थे, उस दौरान नक्सल प्रभावित इलाके में नक्सलियों के हमले में 77 जवान शहीद हो गए थे।
उसके बाद वहां सेना भेजने पर विचार किया गया था। सिंह ने कहा कि जब उनसे सेना भेजे जाने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने साफ इंकार कर दिया।
वीके सिंह बताया कि उन्होंने सरकार को जवाब दिया कि ये आर्मी का मामला नहीं है। इसका समाधान सरकार को करना चाहिए। उन्होंने बताया कि उनके ऐसे जवाब से मंत्री नाराज भी हो गए थे।
भारतीय लोकतंत्र की मौजूदा स्थिति पर टिप्पणी करते हुए पूर्व आर्मी चीफ ने कहा कि भारत के संविधान को जिस भावना के साथ बनाया गया था, वह भावना अब नजर नहीं आती। प्रजातंत्र में कई विसंगतियां आ गई हैं और उन्हें सही करने का समय आ गया है। तरीका बचा है- भारत का पुनरुद्धार।
पूर्व आर्मी चीफ ने कहा कि वे भारत के पुनरुद्धार के लिए समान विचार के लोगों से मिल रहे हैं। उनके अनुसार देश में सामाजिक भेदभाव की घटनाएं बढ़ गई हैं। इसके चलते आज नक्सली गतिविधियां 70 जिलों से बढ़कर 210 जिलों में फैल गई हैं।
जीडीपी के आंकड़ों पर उन्होंने कहा कि इससे हम भले ही खुश हो लें, लेकिन यह सच है कि आज अमीर और अमीर तथा गरीब और गरीब हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव सुधार के बिना स्थिति बदलने वाली नहीं है।
नक्सलवाद की वजहों की ओर ध्यान दिलाते हुए उन्होंने कहा कि आर्थिक असमानता की वजह से नक्सलवाद की समस्या बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि मौजूदा नीतियों से गरीब और गरीब होता जा रहा है, जबकि अमीर और अमीर होता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि आर्थिक और सामाजिक असमानता की वजह से समाज में विसंगतियां आ रही हैं। वीके सिंह ने कहा कि सरकार को जल, जंगल और खनिज को बचाना चाहिए। नक्सल प्रभावित इलाकों में मूलभूत सुविधाओं के विकास पर ध्यान देना चाहिए लेकिन सरकारें इससे मुंह मोड़ रही हैं। उन्होंने कहा कि आर्थिक और सामाजिक विषमताओं को दूर कर ही नक्सलवाद को खत्म किया जा सकता है।
लोकतंत्र का चौथा खंभा भी हुआ कमजोर
वीके सिंह ने मीडिया की वर्तमान स्थिति पर भी सख्त टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि आज मीडिया जर्नलिज्म के आदर्शों से दूर होती जा रही है। इस वजह से लोकतंत्र के चौथे खंभे में भी अन्य तीन खंभों की तरह गिरावट आई है।
उन्होंने कहा कि मीडिया समूहों के मालिकों का हस्तक्षेप बहुत अधिक बढ़ गया है। संपादक बस नाम के संपादक रह गए हैं। मालिक संपादकों को दिशा दे रहे हैं।
आज संपादक बस न्यूज मैनेजर बनकर रह गए हैं। 80 फीसदी मीडिया हाउस पर बिजनेसमैनों और राजनेताओं का कब्जा है। वीके सिंह का कहना था कि जब तक ये हालात रहेंगे, मीडिया में सुधार नहीं हो सकता।
सरकार व नौकरशाही में 99 प्रतिशत भ्रष्टाचार
जनरल सिंह ने मीडिया से कहा कि रक्षा सौदों में भ्रष्टाचार के मामले उठते हैं, लेकिन सेना वह डील नहीं करती। डील सरकार और नौकरशाहों के बीच होती है। सेना केवल उन हथियारों का परीक्षण करती है। ऐसे में सेना में सिर्फ एक प्रतिशत भ्रष्टाचार हो सकता है, लेकिन सरकार और नौकरशाही में 99 प्रतिशत भ्रष्टाचार है।