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मांझी के बगावती तेवर, 20 को बुलाई बैठक

Fri, 06 Feb 2015 12:19 PM IST
टीम डिजिटल / अमर उजाला
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बिहार की राजनीति हर पल नई करवट बदलती जा रही है। हटाए जाने की अटकलों के बीच मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के बगावती सुर तेज हो गए हैं। उन्होंने शनिवार को शरद यादव की ओर से बुलाई गई विधानमंडल दल की बैठक को अवैध करार देते हुए शरद यादव को चुनौती दे दी है।
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मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने अब आगामी 20 फरवरी को विधानमंडल दल की बैठक बुलाई है। इसी के साथ बिहार की सियासत के प्याले में तूफान आ गया है। वहीं मांझी ने सीएम पद से हटाए जाने की अटकलों से साफ इंनकार किया है।

मांझी के अनुसार विधायकों की बैठक बुलाने का अधिकार केवल मुख्यमंत्री को है, शरद यादव इस तरह की बैठक नहीं बुला सकते। माना जा रहा था कि शरद यादव द्वारा सात फरवरी को बुलाई गई बैठक में मांझी को हटाने का फैसला लिया जा सकता था। लेकिन इससे पहले ही मांझी ने 20 फरवरी को विधायक दल की बैठक बुला दी है। मांझी के इन बगावती तेवरों से शीर्ष नेतृत्व के सामने मुश्किल खड़ी हो गई हैं।
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बताया जा रहा है कि मांझी के इस कदम में उनके कुछ मंत्रियों ने भी उनको समर्थन दे दिया है। देर रात तक मुख्यमंत्री आवास पर अन्य मंत्रियों और विधायकों का जुटना भी शुरू हो गया था।
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मांझी ने इस्तीफा देने से किया इंकार

बता दें कि पिछले कुछ समय से अपने विवादित बयानों और छवि के चलते बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी को हटाए जाने की चर्चाएं चलती रही हैं। कभी उनके भाजपा से नजदीकी की चर्चा होती है तो कभी प्रधानमंत्री मोदी से मिलने के लिए समय मांगने की।

पार्टी में ही इसको लेकर जबरदस्त नाराजगी बनी हुई है, जिसके बाद से उन्हें हटाए जाने की मांग उठती रही है। ऐसे में लगातार बदलते घटनाक्रम के बीच शरद यादव ने सात फरवरी को पार्टी विधायकों की बैठक बुलाई थी, जिसमें मांझी को हटाकर दोबारा नीतिश कुमार को मुख्यमंत्री बनाए जाने का निर्णय लिया जा सकता था।

लेकिन इससे पहले ही मांझी ने सारे खेल पर पानी फेर दिया। जबकि इससे पूर्व मांझी की दिन में शरद यादव से भी वार्ता हुई थी। जिसमें उन्हें इस्तीफा देने के लिए मनाने का प्रयास किया गया। पद छोड़ने पर उन्हें पार्टी में बड़ी भूमिका देने के अलावा उनके पुत्र-पुत्री को भी सरकार में शामिल करने का आश्‍वासन दिया गया था।

लेकिन मांझी ने इस्तीफा देने से साफ इंकार कर दिया। जिसके बाद शरद यादव ने बैठक बुलाने का निर्णय लिया था। अब मांझी के नए कदम ने पार्टी के सामने नई मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।
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