अगले लोकसभा चुनाव में मोदी बनाम राहुल के बीच खेले जाने वाले फाइनल से पहले इस साल नवंबर में पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल होना है। मगर कांग्रेस में तेज होती गुटबाजी से राहुल के मिशन पर पानी फिरने का खतरा अभी से मंडराने लगा है।
दरअसल, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में कांग्रेस हर बार की तरह इस बार भी अपनी ऐतिहासिक गुटबाजी की चपेट में आ गई है। राजस्थान और दिल्ली कांग्रेस की आंतरिक कलह भले ही सतह पर नहीं आ रही है, लेकिन अंदरखाने घमासान मचा हुआ है।
मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया को पार्टी की चुनाव अभियान समिति का मुखिया बनाने की बात पिछले एक साल से चल रही है। मगर दिग्विजय सिंह, कमलनाथ और सुरेश पचौरी जैसे दिग्गजों की गुटबाजी की वजह से उन्हें चुनाव अभियान की कमान थमाया जाना मुश्किल लग रहा है।
दूसरी तरफ दिग्विजय गुट के कांतिलाल भूरिया प्रदेश अध्यक्ष बनने के लिए ज्यादा ही महत्वाकांक्षी हो गए हैं। वह खुद को मुख्यमंत्री का उम्मीदवार मानने लगे हैं।
कांग्रेस विधायक दल के नेता और अर्जुन सिंह के बेटे अजय सिंह की सक्रियता से परेशान भूरिया अक्सर उनके रास्ते में रोड़ा बनते रहते हैं। हाल ही में अजय सिंह को भूरिया की बयानबाजी की वजह से सरकार के खिलाफ परिवर्तन यात्रा बीच में ही रद्द करनी पड़ी।
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजित जोगी बेकाबू हो गए हैं। माना जा रहा है कि हाईकमान उनको पार्टी से निकालने पर विचार कर रहा है।
उधर, राजस्थान में सीपी जोशी और अशोक गहलोत के अलावा राहुल गांधी के करीबी जितेंद्र सिंह का भी एक अलग गुट बन गया है। वहीं राज्य में बाहरी लोगों को ज्यादा तवज्जो देने का मसला भी तूल पकड़ रहा है।
सचिन पायलट और चंद्रेश कुमारी को बाहरी होने के बावजूद सांसद और केंद्र में मंत्री बनाने का विरोध हो रहा है। दूसरी तरफ, जाट लॉबी अशोक गहलोत सरकार पर हावी हो रही है।
दिल्ली में मुख्यमंत्री शीला दीक्षित पार्टी का चेहरा हैं। उन्हें कमजोर करने की कोशिश में अजय माकन और प्रदेश अध्यक्ष जयप्रकाश अग्रवाल की गुटबाजी किसी से छिपी नहीं है।
राहुल ने शीला और अग्रवाल दोनों को कई बार गुटबाजी खत्म कर चुनाव की तैयारियों में जुटने के लिए कहा है, लेकिन हालात जस के तस हैं।
आलाकमान को ललकार रहे हैं जोगी
छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अजित जोगी पूरी तरह से बगावती तेवर अख्तियार कर लिया है। वे पूरे प्रदेश में घूम घूमकर पार्टी आलाकमान को ललकार रहे हैं।
जोगी खुलेआम कह रहे हैं कि पार्टी में रखा जाए अथवा निकाल दिया जाए, लेकिन वे वही करेंगे जो वे करना चाहते हैं।
इतना ही नहीं, जोगी प्रदेश कांग्रेस नेताओं के इलाकों का दौरा कर उनके खिलाफ ही झंडा बुलंद कर रहे हैं। वह अभी तक प्रदेश अध्यक्ष चरण दास मंहत, भूपेश बघेल, धनेंद्र साहू समेत तमाम नेताओं को हराने की खुली हुंकार भर चुके हैं।
वह अपनी सभाओं में अपने उम्मीदवारों के नाम भी घोषित कर रहे हैं। इन सभाओं में वह सोनिया और राहुल गांधी का नाम तक नहीं लेते है और न ही पोस्टरों पर उनकी तस्वीर होती है।