दिल्ली में हुई दरिंदगी पर पूरा देश गुस्से में है। डेढ़ साल पहले बरेली के एक गांव में एक नन्ही बच्ची भी कुछ इसी तरह एक दरिंदे का शिकार बनी थी। विशेष न्यायाधीश यूसी पांडेय ने इसे जघन्यतम अपराध मानते हुए बलात्कार के जुर्म में अभियुक्त को अधिकतम सजा उम्रकैद और हत्या के अभियोग में सजा-ए-मौत देने का फैसला सुनाया। इसके अलावा उस पर एक लाख का जुर्माना भी किया गया है। इस मामले में एक और बात अहम थी कि यह बच्ची गरीब दलित परिवार की थी।
यह घटना थाना भुता के गांव सिकली गढ़ गौंटिया में 27 मई 2009 को घटी। दलित हीरालाल की दस वर्षीय बेटी सुबह दस बजे अपने सात साल के चचेरे भाई के साथ बकरी चराने गई थी। दोनों बहन-भाई बुधौली के मनीष पाल सिंह के ट्यूबवेल पर पानी पीने गए। ट्यूबवेल पर चौकीदार अशोक कुमार ने मीरा के साथ दुराचार करने के वाद गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। लाश को भूसे के खेत में दबा दिया। लाश को घटना वाले दिन ही पुलिस ने बरामद कर लिया। रात में ही किशोरी की लाश का पोस्टमार्टम तीन डॉक्टरों के पैनल ने किया।
सरकारी वकील ने अदालत में लड़की के पिता हीरालाल समेत दस गवाह पेश किए। अदालत ने मामले को विरल से विरलतम अपराध की श्रेणी का मानते हुए सोमवार को यह सजा सुनाई। अदालत का यह फैसला लड़की के पिता हीरालाल के लिए मरहम का काम करता, लेकिन दुखद पहलू यह है कि सिर्फ हीरालाल ही नहीं, बल्कि उनकी पत्नी भी अब इस दुनिया में नहीं हैं। इस शर्मनाक हादसे के बाद सदमे और फिर बीमारी के बाद दोनों की पिछले साल ही मौत हो चुकी है। अपमानित होकर मीरा के भाई रामनिवास ने भी गांव छोड़ दिया। उनके परिवार का कोई भी सदस्य अब इस गांव में नहीं रहता।