दुष्कर्म पीड़ित 19 वर्षीय गर्भवती युवती ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर परिवार की दयनीय वित्तीय हालत का हवाला देकर बच्चे के जन्म और देखभाल के लिए वित्तीय सहायता मांगी है।
उसने कहा कि गरीबी की हालत में वह प्रसव व बच्चे की देखभाल में असमर्थ है। हाईकोर्ट ने केंद्र व दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाबतलब किया है।
न्यायमूर्ति राजीव शकधर ने दोनों को 6 जून को अपना पक्ष रखते हुए यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्यों न याचिका स्वीकार कर बच्चे के जन्म व उसके 18 वर्ष का होने तक पूरा खर्च प्रदान करने का निर्देश दिया जाए।
याची के अधिवक्ता निशित कुश ने अदालत को बताया कि युवती से उसके पड़ोसी संजय चौधरी ने पिछले वर्ष अक्तूबर में दुष्कर्म किया और उसकी आपत्तिजनक फोटो खींच ली।
इतना ही नहीं उसने किसी को भी इस घटना की जानकारी देने पर उसके भाई की हत्या करने की धमकी भी दी थी। तीन मार्च को जांच के दौरान डॉक्टरों ने उसे पांच माह का गर्भवती बताया।
इसके बाद चार मार्च को युवती ने मानसरोवर पार्क थाने में शिकायत दर्ज करवाई।
उन्होंने कहा कि अभियुक्त अभी भी फरार है। युवती ने गर्भपात करवाने की इजाजत के लिए अदालत में आवेदन किया था, लेकिन डॉक्टरों ने उसकी जान को खतरा बताया।
अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि युवती बिना विवाह के बच्चे को जन्म देने के कलंक के कारण पहले से ही काफी मानसिक आघात में है। ऐसे में सरकार को निर्देश दिया जाए कि युवती के प्रसव और बच्चे के 18 वर्ष होने तक का पूरा खर्च वहन करे।