जनता परिवार के छह दलों ने भले ही अपने विलय का पिछले दिनों औपचारिक ऐलान कर दिया हो लेकिन इसका मूर्त रूप लेना फिलहाल मुश्किल ही दिख रहा है। इसके संकेत सपा महासचिव रामगोपाल यादव ने दिए हैं।
रामगोपाल का कहना है कि बिहार विधानसभा चुनाव से पहले यह विलय संभव नहीं है और अभी ऐसा कोई भी कदम सपा के लिए डेथ वारंट साबित होगा। हालांकि उन्होंने कहा कि तकनीकी दिक्कतों की वजह से विलय की प्रक्रिया में देरी हो रही है। इस बीच सपा नेता के बयान पर जदयू अध्यक्ष शरद यादव ने कहा कि विलय पहले ही हो चुका है और इस मुद्दे पर बोलने का अधिकार सिर्फ सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह को है।
सपा नेता ने कहा कि लालू प्रसाद यादव के नेतृत्व वाली राजद और नीतीश कुमार की जदयू के लिए यह बेहतर विकल्प होगा कि वे विधानसभा चुनाव आपस में सीटों का बंटवारा कर लड़ें क्योंकि यदि अभी विलय होता है तो दोनों पार्टियों को अपना चुनाव चिह्न गंवाना पड़ेगा और इससे मतदाताओं के बीच भ्रम की स्थिति उत्पन्न होगी।
रामगोपाल ने कहा कि तकनीकी दिक्कतों के चलते बिहार विधानसभा चुनाव से पहले विलय संभव नहीं है। यदि जल्दबाजी में हम विलय कर लेते हैं तो यह हमारी खुद की पार्टी के लिए डेथ वारंट साबित होगा।