भले ही अभी तक नरेंद्र मोदी ने देश के अगले प्रधानमंत्री के रूप में शपथ नहीं ली हो। इससे पहले ही राम मंदिर का मुद्दा गूंजने लगा है। इसको लेकर बयानबाजी शुरू हो गई है।
इसकी शुरूआत विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) के नेता अशोक सिंघल ने की है। विहिप नेता कहा कि बीजेपी को बहुमत से सत्ता में लाने का एकमात्र उद्देश्य राम मंदिर निर्माण नहीं था।
सिंघल ने कहा, 'हमारा एक ही लक्ष्य था भारी बहुमत के साथ संसद में आना। केवल राममंदिर का निर्माण हमारा लक्ष्य नहीं था। हम चाहते थे कि इतने बहुमत से आएं कि राम मंदिर भी बन जाए और कोई मंदिर को गिराने की हिम्मत नहीं करे।"
उन्होंने कहा, "जब देश में इतना बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम हुआ है, मुसलमानों को सुनिश्चित करना चाहिए कि उनका वोट बैंक की तरह इस्तेमाल नहीं हो और उन्हें ऐसा होने भी नहीं देना चाहिए।"