भाजपा को अपने बयानों से कई बार मुश्किल में डाल चुके राम जेठमलानी ने अब भाजपा के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया है।
जेठमलानी ने बीजेपी संसदीय बोर्ड के 11 में से नौ सदस्यों से 50-50 लाख रुपए का हर्जाना मांगा है। साथ ही उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका में उनका निष्कासन रद्द करने की भी मांग की है।
हालांकि किसी कमी के चलते फिलहाल उन्होंने मानहानि याचिका वापस भी ले ली है। जेठमलानी की याचिका पर कुछ आपत्ति जताई गई थी और उस पर अभी सुनवाई तय नहीं हुई थी। सोमवार को उन्होंने रजिस्टरी से अपनी याचिका वापस ले ली।
अटल और मोदी को छोड़ा
याचिका में उन्होंने तर्क रखा है कि भाजपा संसदीय बोर्ड ने उनको बिना कोई कारण बताए व अपना पक्ष रखने का मौका दिए बिना ही पार्टी से निलंबित कर दिया था और उसके बाद उन्हें छह वर्ष के लिए पार्टी से निकाल दिया।
जेठमलानी ने याचिका में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी व नरेन्द्र मोदी को छोड़ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी सहित सभी बोर्ड सदस्यों को पार्टी बनाया है। उन्होंने सभी सदस्यों से बतौर हर्जाना 50-50 लाख रुपये दिलवाने का आग्रह किया है।
उन्होंने याचिका में कहा कि भाजपा संसदीय बोर्ड को उन्हें निलंबित करने का अधिकार नहीं है। जेठमलानी को भाजपा नेता सुषमा स्वराज व अरुण जेटली के खिलाफ खुलेआम बयानबाजी करने पर मई माह में छह वर्ष के लिए पार्टी की सदस्यता से निलंबित कर दिया गया था।