उत्तराखंड आपदा ने देश के सैकड़ों परिवारों में होने वाले रक्षाबंधन जैसे पवित्र पर्व पर ही बंधन डाल दिया है। जहां एक ओर सैकड़ों घरों के कमाऊ पूत अब भी गुमशुदा हैं, वहीं कई बहनें भी लापता हैं।
उधर, आतंकी अब्दुल करीम टुंडा की गिरफ्तारी के बाद इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) ने पाकिस्तानी भेजी जा रही राखी डाकों पर कड़ी नजर रखनी शुरू कर दी है। उत्तराखंड के कई इलाकों की बहनों की सूनी आंखों में अबकी राखी पर भाई का अंतहीन इंतजार है।
भाई भी बहनों की गैरमौजूदगी को बड़ी शिद्दत से महसूस कर रहे हैं। केदारनाथ त्रासदी में पोखरी ब्लाक के लाली गांव की बहनों संगीता और हेमा के सिर से पिता का साया एक दशक पहले उठ चुका था। उनके लिए तो भाई सूरज, चंदा और अनमोल रतन था। पर कुदरत ने इसे छीन लिया।
गैरसैंण के सारकोट गांव में पुष्पा, कामेश्वरी और गैंणी से उनके एकलौते भाई हमेशा के लिए दूर हो गए हैं। इस साल अब सिर्फ उनकी यादें और आंखों में आंसू हैं।
केदारनाथ त्रासदी में अपने भाई रोहित को खो चुकी साधना इस बार नए भाई लक्ष्मण सिंह नेगी के साथ भाई का नया नाता जोड़ने जा रही है।
लक्ष्मण ने साधना को रक्षाबंधन पर दस हजार रुपये भेज दिए हैं। इस दुखद माहौल में सुकून की बात यह है कि सपा और शिवानी जैसे कई बहनों को अब एक नहीं, बल्कि कई सारे भाई राखी बंधवाने को मिल गए हैं।
इधर, आतंकी अब्दुल करीम टुंडा की गिरफ्तारी के बाद इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) की छानबीन के बाद ही सभी राखी डाक को पाकिस्तान भेजा जा रहा है।
दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और पंजाब से सोमवार तक पांच हजार रजिस्टर्ड व सात हजार साधारण राखी डाक पाकिस्तान के विभिन्न शहरों तक भेजी गई है।
जबकि पाकिस्तान से भेजी गई लगभग तीन हजार राखियां विदेश डाक विभाग से गंतव्य तक भेजी गई हैं। रक्षा बंधन के लिए सोमवार को पाकिस्तान के कराची और लाहौर के लिए एक सौ से अधिक राखी डाक यहां से भेजी गई।
कुरूक्षेत्र की सुनीता, पंजाब के मेहताब सिंह और रूड़की की आस्था ने भी पाकिस्तान राखी भेजी है। इसके अलावा इंग्लैंड, अमेरिका, न्यूजीलैंड, आस्ट्रेलिया भी दिल्ली से सैकड़ों राखियां भेजी गई हैं।
विदेश डाक विभाग के निदेशक प्रणव कुमार का कहना है कि पाकिस्तान भेजी जा रही राखी डाक को जांच के बाद तत्काल गंतव्य तक भेजा जा रहा है।
रिश्ते की राह दिखातीं मुस्लिम बहनें
मुरादाबाद। पाकिस्तान भले ही आतंकी घुसपैठ, सीमा पार से गोलीबारी और जवानों की हत्या जैसी हरकतों से बाज नहीं आ रहा हो, लेकिन मुरादाबाद की कई मुस्लिम बहनें दो दशकों से हिंदू भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर पड़ोसी मुल्क के साथ-साथ दो धर्मों के बीच नफरत पैदा करने वालों को सुधरने का संदेश दे रही हैं।
सलमा, सीमा अनवर, रेशमा, फरहना जैसी मुसलिम बहनें न केवल राखी के रिश्ते को लंबे समय से निभा कर मिसाल पेश कर रही हैं, बल्कि दो धर्मों की लकीर को मिटा देना चाहती हैं।
राखी नहीं भेजेंगी सरबजीत की बहन
‘जिस पाकिस्तान में साजिश रचकर जेल के अंदर मेरे भाई का कत्ल कर दिया गया, उस मुल्क के हुक्मरानों को अब राखी भेजने का सवाल ही नहीं उठता है।’
यह कहना है लाहौर की कोट लखपत जेल में हमले का शिकार हुए सरबजीत सिंह की बहन दलबीर कौर का। जेल में बंद रहने के दौरान वह लगातार 23 साल तक सरबजीत के साथ ही पाकिस्तानी सत्ता के शीर्ष पर बैठे हुक्मरानों के लिए भी राखी भेजती थीं।
रक्षाबंधन के एक दिन पहले पंजाब के भिखीविंड गांव में सरबजीत के घर मौजूद बहन दलबीर कौर ने ‘अमर उजाला’ को फोन पर बताया कि तत्कालीन पाक राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को राखी भेजी थी जिसके बाद उन्होंने सरबजीत की फांसी की सजा को अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया था।
पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और पाक के पूर्व आंतरिक सुरक्षा मंत्री को भी उन्होंने राखी भेजकर भाई को फांसी के फंदे से रहम देने की अपील की थी। लेकिन, साजिश रचकर जेल में सरबजीत पर हमला और फिर इलाज के लिए बाहर न भेजकर पाक हुक्मरानों ने राखी की लाज तोड़ दी।
उन्होंने कहा कि वह रक्षाबंधन के दिन अमृतसर जेल में उन कैदियों को राखी बांधेंगी, जिनकी बहनें उन तक नहीं पहुंच पाई हैं।