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मोदी की नामांकन कुंडली में राजयोग लेकिन भितरघात की आशंका

Fri, 25 Apr 2014 07:33 AM IST
अनूप ओझा/अमर उजाला, वाराणसी
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भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने जिस समय वाराणसी लोकसभा सीट से अपना नामांकन पत्र दाखिल किया उस समय की कुंडली में राजयोग का फलादेश निकला है। दोपहर 2:05 पर जब उन्होंने नामांकन पत्र भरा तब सिंह लग्न उदित था।
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उच्च का सूर्य होने के साथ ही राहु और शनि की युति पराक्रम बल को समृद्ध बना रही थी। नवम भाव का केतु होने के कारण भिरतरघात की भी आशंका है।

ऐसे में ज्योतिषविद ने मोदी और उनके निकट सहयोगियों को अतिविश्वास से बचने की सलाह दी है।

सात समंदर पार तक होगी ख्याति!

नामांकन कुंडली के अनुसार जब मोदी ने नामांकन पत्र पर हस्ताक्षर किया तब लग्नेश सूर्य नवम त्रिकोण भाव में उच्चराशि का स्थित होकर बुध के साथ युति करता हुआ बुधित्य योग बना रहा था।

उच्च का सूर्य अकेले मोदी को उच्चतम बिंदु पर ले जाने के लिए पर्याप्त होगा। जातक ग्रंथों की मानें तो यदि लग्नेश लग्न या त्रिकोण में बलवान होकर स्थित हो तो उस व्यक्ति की ख्याति सात समंदर पार तक फैलती है। कुछ ऐसे ही लक्षण मोदी की नामांकन कुंडली में मिले हैं।

इसके अलावा तृतीय भाव में राहु और शनि की युति भाजपा के पीएम पद के दावेदार के पराक्रम बल को अत्यंत समृद्ध कर रही थी। उच्च राशि का शनि और साथ में राहु दोनों मोदी की कार्य क्षमता में वृद्धि करेंगे।

बौद्धिक होंगे मोदी की तरफ आकर्षित

महावीर पंचांग के संपादक ज्योतिषाचार्य पं. रामेश्वर ओझा के मुताबिक इस युति के परिणाम स्वरूप समाज के सभी वर्गों का समवेत समर्थन मोदी को मिलेगा। सप्तम भाव में चंद्रमा और शुक्र की युति भी योग कारक है।

इसके अतिरिक्त लाभस्थान में गुरु स्थित होकर यह स्पष्ट संकेत दे रहा है कि काशी के बौद्धिक समाज में मोदी के प्रति आकर्षण पैदा होगा। द्वितीय भाव का मंगल शत्रु क्षेत्रीय है। नवम भाव का केतु भी कुछ भितरघात की स्थिति पैदा कर सकता है। अंत: मोदी को या उनके निकट सहयोगियों को अति विश्वास से बचना होगा। मोदी ने धनिष्ठा और सतभिखा नक्षत्रों की संधि वेला पर नामांकन पत्र दाखिल किया।

बैसाख का महीना स्वत: विष्णु का महीना है, ऊपर से गुरुवार की दिन भी उन्हें प्रिय है। साथ ही दशमी तिथि (पूर्णा तिथि) और गुरुवार के योग से सिद्धि योग भी है। अत: मृत्यु लोक में भद्रा होने के बावजूद यह परिस्थितियां शुभ स्थितियों की अधिकता के कारण भद्रा के कुफल को काफी हद तक सीमित कर देंगी।
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मोदी को मिलेगी भारी जीत!

उधर, ज्योतिषविद् पं. ऋषि द्विवेदी के मुताबिक गुरुवार को दोपहर बाद 1:30 से तीन बजे तक राहुकाल था। मोदी की नामांकन कुंडली को देखा जाए तो उन्होंने सिंह लग्न कुंभ राशि में पर्चा दाखिल किया। इस कुंडली में लग्नेश सूर्य भाग्य स्थान पर बैठा हुआ है और भाग्येश मंगल कन्या राशि में वक्रीय होकर बैठा है।

पंचम भाव का स्वामी बृहस्पति जो पद-प्रतिष्ठा से जुड़ा ग्रह माना जाता है, पंचम भाव को सप्तम दृष्टि से देख रहा है। पंचम भाव पर ही मंगल की भी चतुर्थ दृष्टि पड़ रही है। वहीं, सिंह लग्न को स्थिर लग्न माना गया है लेकिन भाग्य स्थान से षष्ठ भाव में बैठे मंगल और सूर्य के केतु से ग्रसित होने से लगता है कि मोदी को भारी जीत मिलेगी। चूंकि मोदी की जन्म कुंडली वृश्चिक लगन व राशि की है और दशमेश सूर्य मजबूत स्थिति में है। साथ ही उन्होंने नामांकन भी सिंह लग्न में किया।

अत: जन्म कुंडली एवं नामांकन की कुंडली के मिलान से शुभ संयोग तो बन रहा है लेकिन राहुकाल में नामांकन आने वाले समय में उनकी राह में बाधा उत्पन्न कर सकता है।
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