ट्रांसजेंडर के अधिकारों से जुड़े सांसदों के निजी
विधेयक को शुक्रवार को राज्यसभा में पारित कर दिया गया। भले ही इस बिल को
पारित करने में सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने तकनीकी
कारणों का हवाला देते हुए आपत्ति जताई लेकिन डीएमके नेता तिरुचि शिवा के
वोटिंग पर अड़े रहने की वजह से ध्वनि मत से आखिरकार यह बिल पास हो गया।
महत्वपूर्ण यह है कि वोटिंग पर अड़े शिवा को मनाने के लिए परंपरा से अलग
जाकर तीन केंद्रीय मंत्रियों और आसन की ओर से सरकार के आश्वासन को मानने
का अग्रह किया गया। मालूम हो कि राज्यसभा या लोकसभा में किसी निजी बिल को
इस तरह का समर्थन कम ही देखने को मिलता है। करीब 36 साल बाद किसी निजी बिल
को सदन में मंजूरी मिली है। इससे पहले 1979 में अलीगढ़ मुस्लिम
विश्विविद्यालय कानून 1977 में संशोधन के लिए एक निजी विधेयक पारित हुआ था।
यह बिल ऐसे वक्त ध्वनि मत से पारित हुआ है, जब विपक्ष और सत्ता पक्ष जमीन
बिल और किसानों के मसले पर बुरी तरह से बंटे हैं। राइट्स ऑफ ट्रासंजेंडर
पर्सन बिल,2014 को डीएमके नेता तिरुचि शिवा ने पेश किया था। इस पर चर्चा आज
पूरी होने के बाद इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।