अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के दस्तावेजों में दावा किया गया है कि शीत युद्ध के दौरान सोवियत संघ के करीबी माने जाने वाले भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने एक समय पाकिस्तान में सोवियत संघ विरोधी गुटों को समर्थन करने का मन बना लिया था।
हाल में सार्वजनिक किए गए सीआईए के गोपनीय दस्तावेजों में कहा गया है कि राजीव यह मानते थे कि अगर सोवियत संघ पाकिस्तान के तत्कालीन जनरल जियाउल हक के शासन को खत्म करवाता है, तो भारत वहां रूस विरोधी नागरिक समूहों का समर्थन करेगा। उनका मानना था कि दक्षिण एशिया में अमेरिका के साथ-साथ सोवियत संघ की भी दखलंदाजी का बढ़ना क्षेत्र के लिए ठीक नहीं है।
सीआईए ने शीत युद्ध के समय के इन दस्तावेजों को फ्रीडम ऑफ इंफॉर्मेशन एक्ट (भारत के आरटीआई के समान) के तहत अपनी वेबसाइट पर पोस्ट किया है। राजीव गांधी क्षेत्र में अमेरिका और सोवियत संघ का हस्तक्षेप नहीं चाहते थे।