रेलवे जल्द ही वर्तमान संसाधनों और तकनीक में सुधार कर राजधानी, शताब्दी तथा दूरंतो जैसी ट्रेनों की रफ्तार 160 से 200 किमी करने जा रहा है।
वर्तमान में इन ट्रेनों की सामान्य स्पीड 90 से 120 किमी प्रति घंटा है। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष अरुणेंद्र कुमार ने कहा कि हम वर्तमान संसाधनों में सुधार तथा प्रशिक्षण के माध्यम से यह लक्ष्य जल्द हासिल कर लेंगे।
रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष ने बताया कि मंत्रालय सेमी हाई स्पीड ट्रेन चलाने के लिए काफी समय से प्रयासरत है। हम देश विदेश के तमाम विशेषज्ञों से इस पर विचार करते रहे हैं।
हाई स्पीड ट्रेन (300 किमी प्रति घंटा) के लिए डेडीकेटेड ट्रैक तथा ट्रैक को पूरी तरह से सुरक्षित करना जरूरी होता है। इस तरह के प्रोजेक्ट के लिए रेलवे के पास संसाधन नहीं है।
उन्होंने कहा, 'हमारी कोशिश है कि उससे पहले हम वर्तमान शताब्दी, राजधानी जैसे ट्रेन रूटों को ही अपग्रेड करके 160 से 200 किमी की गति से ट्रेनों को चलायें। इसके लिए रेलवे कर्मचारियों को विशेष रूप से प्रशिक्षित किये जाने की जरूरत होगी।'
उन्होंने बताया कि वर्तमान में देश में ही तैयार की जा रही एलएचबी कोच को 200 किमी की रफ्तार से चलाया जा सकता है। हमें गति बढ़ाने से पहले रेल के पहियों, ब्रेक तथा सिग्नलिंग सिस्टम में कुछ सुधार करना होगा।
किराए पर फैसला नहीं
क्या ट्रेनों की गति बढ़ने के साथ ही रेलवे इन ट्रेनों के किराये में भी वृद्धि करेगा। इस सवाल पर अरुणेंद्र कुमार ने कहा कि अभी इस बारे में कोई फैसला नहीं लिया गया है। उन्होंने बताया कि सेमी हाई स्पीड के बाद राजधानी दिल्ली से मुंबई की यात्रा 17 घंटे के बजाय 14 घंटे में ही पूरा कर लेगी।
200 किमी की रफ्तार से ट्रेन को चलाने का पायलट प्रोजेक्ट कब तक शुरू होगा, इस बारे में खुलासा नहीं करते हुए उन्होंने कहा कि जल्द से जल्द हम यह काम शुरू करना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि 29 व 30 अक्तूबर को इसी संबंध में विस्तृत विमर्श के लिए दिल्ली में एक अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस बी आयोजित की जा रही है।