टूजी घोटाले के प्रमुख आरोपी व पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा ने भी मामले की जांच कर रही जेपीसी की विश्वसनीयता पर सवाल उठा दिए हैं।
जेपीसी चेयरमैन पीसी चाको को भेजे लंबे पत्र में राजा ने फिर से दावा किया है कि मंत्रालय के हर फैसले की जानकारी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पी चिदंबरम और प्रणब मुखर्जी को रहती थी।
राजा ने कहा, ‘सभी बड़े फैसले टेलीकॉम विभाग के अधिकारियों, पीएम, वित्त मंत्री पी चिदंबरम और स्पैक्ट्रम मामले के लिए गठित मंत्रिमंडल समूह के अध्यक्ष विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी से सलाह करने के बाद ही लिए जाते थे।’
उन्होंने कहा, ‘एंट्री फीस, स्पेक्ट्रम के लिए नीलामी, पहले आओ, पहले पाओ प्रक्रिया जैसे सभी मुद्दों पर उनसे विचार विमर्श किया गया था। इन सभी मुद्दों पर मैंने निजी तौर पर पीएम और टेलीकॉम विभाग से चर्चा की थी।’
जेपीसी प्रमुख पीसी चाको को भेजे गए अपने लिखित जवाब में उन्होंने इस बात का कड़ा विरोध किया है कि उन्होंने फैसले लेते वक्त प्रधानमंत्री को गुमराह किया था। उन्होंने किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले अपने और प्रधानमंत्री का बयान रिकॉर्ड करने की मांग की।
राजा ने कहा, ‘अक्सर यह आरोप लगाए जा रहे हैं कि मैंने माननीय प्रधानमंत्री को गुमराह किया है। मैं इस मुद्दे पर कहना चाहूंगा कि सीबीआई ने बिना प्रधानमंत्री का बयान रिकॉर्ड किए यह आरोप लगाए हैं। ऐसे में वह किस आधार पर कह सकते हैं कि पीएम को गुमराह किया गया था।'
'मुझे उम्मीद है कि जेपीसी भी यही गलती नहीं दोहराएगी। अगर वह किसी नतीजे पर पहुंचना चाहते हैं, तो दोनों को बयान दर्ज करना बेहद जरूरी है।’