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मराठी मुद्दा छोड़ अब हिंदुत्व की राजनीति करेंगे राज ठाकरे

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कट्टर मराठीवाद की राजनीति करने वाले महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे भी अब हिंदुत्व के  एजेंडे पर लौटने की तैयारी में है। मराठी मुद्दा फुस्स होने के बाद अब उन्होंने पाला बदलने के संकेत दिए हैं।
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मुंबई के रूईया कॉलेज में पत्रकारिता विभाग के छात्रों के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा है कि वह हिंदु हैं और हिंदुत्व के लिए लड़ेंगे। वह यह बताना नहीं भूले कि जब मुंबई के ऐतिहासिक आजाद मैदान में धर्मांध मुस्लिमों ने महिला पुलिसकर्मियों की बेरहमी से पिटाई की थी तब केवल उनकी ही पार्टी इसके खिलाफ सड़कों पर उतरी थी।

छात्रों के सवालों के जवाब में ठाकरे ने कहा कि उनकी पार्टी के झंडे में हरा रंग सरोद वादक अमजद अली खान और तबला वादक जाकिर हुसैन जैसे लोगों के लिए है।
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इसलिए पकड़ी बदलाव की राह

उनका यह बयान हिंदुत्व के एजेंडे पर लौटने का ठोस संकेत माना जा रहा है। दरअसल इससे पहले उनका एकमात्र राजनीतिक एजेंडा मराठी था।

पार्टी सूत्र भी मान रहे हैं कि राज ठाकरे जल्द ही सार्वजनिक मंच से हिंदुत्व की आवाज बुलंद कर सकते हैं। माना जा रहा है कि मनसे प्रमुख ने अगले साल मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) चुनाव को देखते हुए बदलाव की राह पकड़ी है।

इसकी कई वजह मानी जा रही है। बीते साल लोकसभा और विधानसभा चुनाव में मराठी वोटरों ने उनसे मुंह मोड़ लिया था और शिवसेना की ओर चले गए थे। राज ठाकरे को केवल 2009 में उत्तर भारतीयों के खिलाफ जहर उगलने का तात्कालिक लाभ मिला था।
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