अब यदि आपके पास रेल के तत्काल ‘वेटिंग’ टिकट है, तो इसका फायदा सीट मिलने में नहीं होगा। रेलवे ने अपना वह सर्कुलर वापस ले लिया है जिसमें कुछ महीने पहले कहा गया था कि तत्काल टिकट वालों को ‘वेटिंग’ के क्लीयरेंस के दौरान प्राथमिकता दी जाए।
रेलवे के इस सर्कुलर के खिलाफ यहां मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थी, जिस पर दिसंबर 12, 2012 को अदालत ने रेलवे से इस संबंध में विशेष सुनवाई के लिए योग्य अधिकारी की नियुक्ति का आदेश दिया।
इस पर रेलवे ने मंगलवार को कोर्ट में समीक्षा याचिका दायर कर कहा कि वह अपना सर्कुलर वापस ले रहा है। अत: अब वेटिंग लिस्ट के निपटारे के दौरान तत्काल टिकट धारकों को मिलने वाली प्राथमिकता खत्म हो जाएगी।
यह जनहित याचिका एक पत्रकार संजीव पांडे ने दायर की थी जिसमें कहा था कि इस सर्कुलर के कारण बड़ी संख्या में उन यात्रियों को नुकसान होता है जो तीन से चार महीने पहले अपने टिकट बुक कराते हैं।
याचिका में कहा गया था कि सर्कुलर से साफ है कि रेलवे जन कल्याण की संस्था से एक शुद्ध व्यवसायी संस्थान में तब्दील हो चुका है क्योंकि उसे तत्काल टिकट पर ज्यादा धन मिलता है। यदि तत्काल टिकट में ‘वेटिंग’ को प्राथमिकता जारी रही तो इससे आम आदमी के हित प्रभावित होंगे।
उल्लेखनीय है कि रेलवे बोर्ड ने 15 मई 2012 को तत्काल टिकट को ‘वेटिंग’ में प्राथमिकता देने वाला सर्कुलर जारी किया था।