रेल मंत्रालय ने 1 अक्तूबर से एसी क्लास के सभी टिकटों पर 3.6 प्रतिशत सर्विस टैक्स वसूलने का आदेश जारी कर दिया है। वित्त मंत्रालय द्वारा पिछले बजट में रेल सेवाओं पर सर्विस टैक्स लगाए जाने के फैसले को ममता बनर्जी के कड़े विरोध के चलते अभी तक लागू नहीं किया जा सका था। ममता के सरकार से अलग होने के बाद अब केंद्र सरकार ने रेलवे में भी सुधार की शुरुआत कर दी है।
उल्लेखनीय है कि पिछले बजट में तत्कालीन वित्त मंत्री ने विभिन्न रेल सेवाओं पर 12 प्रतिशत तक सेवाकर लगाने का प्रस्ताव किया था। तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता व कुछ अन्य दलों को विरोध को देखते हुए इस कर को वित्त मंत्रालय ने 30 जून तक स्थगित किए जाने के साथ ही यात्री टिकटों पर सर्विस टैक्स घटाकर 3.6 प्रतिशत करने के साथ ही इसे केवल एसी क्लास तक सीमित कर दिया था।
जुलाई में इस टैक्स को लागू किए जाने से पहले तत्कालीन रेल मंत्री ने एक बार फिर इस पर विरोध जताया। उन्होंने वित्त मंत्रालय को पत्र भेजकर रेल सेवाओं पर सेवा कर लगाए जाने का विरोध किया था। वित्त मंत्रालय से सकारात्म जवाब नहीं मिलने के बाद मुकुल राय ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिलकर हस्तक्षेप करने की मांग की थी। केंद्र सरकार में सहयोगी दल तृणमूल कांग्रेस तथा उसके मंत्री मुकुल राय के विरोध को देखते हुए वित्त मंत्रालय ने दो जुलाई को एक अधिसूचना जारी कर सर्विस टैक्स को 30 सितंबर तक स्थगित कर दिया था।
अब बदली हुई परिस्थितियों में नए रेल मंत्री सीपी जोशी से हरी झंडी मिलते ही रेल मंत्रालय ने यात्रियों से एक अक्तूबर से एसी श्रेणी में सफर करने वाले सभी यात्रियों से 3.6 प्रतिशत सर्विस टैक्स वसूलने का आदेश जारी कर दिया है। रेलवे बोर्ड के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर पैसेंजर मार्केटिंग के हस्ताक्षर से जारी सर्कुलर संख्या 58 दिनांक 26 सितंबर, में कहा गया है कि सभी संबंधित अधिकारी टिकट के साथ सर्विस टैक्स वसूली के लिए जरूरी कार्रवाई सुनिश्चित करें। उल्लेखनीय है कि जो यात्री पहले से टिकट आरक्षित करा चुके हैं उन यात्रियों से पहली अक्तूबर के बाद टीटीई ट्रेन में सर्विस टैक्स की राशि को अलग से वसूल करेंगे। इसके लिए यात्रियों को रसीद भी प्रदान की जाएगी।