अगले लोकसभा चुनाव की तैयारियों की समीक्षा कर रहे पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी कांग्रेस के ढांचे में बदलाव को एक ही झटके में अमलीजामा नहीं पहनाएंगे। राहुल ने साफ कहा है कि बेशक कांग्रेस को नए जमाने की चुनौतियों के हिसाब से काफी कुछ बदला जाएगा, मगर यह बदलाव धीरे-धीरे होगा।
राहुल के इस रुख से साफ है कि कम से कम अगले लोकसभा चुनाव तक कांग्रेस अपने ढांचे में किसी क्रांतिकारी बदलाव से परहेज करेगी। वैसे राहुल ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कांग्रेस में अब ओहदे या जिम्मेदारी देने के साथ ही जवाबदेही भी तय कर दी जाएगी।
आम चुनाव से लेकर इस साल होने वाले कई राज्यों के विधानसभा चुनावों में पार्टी की तैयारियों की जमीनी हकीकत से रूबरू होने के लिए राहुल गांधी ने शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन कांग्रेस के शीर्ष पदाधिकारियों के साथ लंबी बैठक की।
बैठक में तमाम पदाधिकारियों ने पार्टी संगठन की खामियों पर अपनी राय जाहिर करते हुए बदलाव की बात कही। सबकी बातें सुनने के बाद कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा कि संगठन में बदलाव सोच-समझकर और सबको साथ लेकर किया जाएगा। पार्टी संगठन में परिवर्तन में वक्त लग सकता है।
उनका कहना था कि कोई भी बदलाव सबको सुनने-समझने के बाद ही होगा। साथ ही राहुल ने व्यवस्था की खामियों को दूर करने पर बल दिया। चुनाव में जीत हार से लेकर तमाम अहम मामलों में दिग्गजों की जिम्मेदारी तय नहीं होने को लेकर भी बैठक में सवाल उठे। इस पर राहुल ने कहा कि उत्तरदायित्व के साथ ही जवाबदेही तय होगी। यह सिस्टम वे जरूर लागू करेंगे।
संगठन के फैसले में वक्त लेने की बात करते हुए राहुल ने कहा कि चुनावी सियासत से जुड़े फैसले जल्दी लिए जाएंगे। कई सचिवों ने कामकाज का मौका नहीं मिलने की शिकायत की तो राहुल ने बीच-बीच में टोकते हुए कहा कि वे सुनिश्चित करेंगे कि सबको उचित मौका मिले। साथ ही काम करने वालों का मूल्यांकन करने की बात से भी उन्होंने सहमति जताते हुए अंदरूनी मानिटरिंग की राय जाहिर की।
पार्टी सचिव अशोक तंवर ने अहम मुद्दों और संगठन में असमंजस की स्थिति साफ करने की बात उठाई तो अनीस दुरानी ने अल्पसंख्यकों के मामले उठाए। राहुल ने सबको केवल संगठन के मामले तक सीमित रहने की नसीहत दी।
उन्होंने कहा कि अन्य मसलों पर अगली बैठकों में चर्चा होगी। बैठक में तेलंगाना मुद्दे पर गुलाम नबी आजाद के सिर ठीकरा फोड़ रहे सचिव सुधाकर रेड्डी को बीच में रोकते हुए राहुल ने कहा कि संवेदनशील मसले पर जल्दबाजी में निर्णय नहीं होते। बैठक में मौजूद 49 पदाधिकारियों में से 13 को बोलने का मौका मिला। पार्टी महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने कहा कि चूंकि चर्चा अधूरी होने की वजह से बैठक सोमवार को भी होगी।