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राजीव की हत्या पर राहुल का इमोशनल कार्ड

Thu, 20 Feb 2014 04:44 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
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पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या को 22 साल से ज्यादा वक्त गुजर चुका है, लेकिन देश की सियासत कुछ ऐसी है कि कालीन के नीचे दबा यह मामला बार-बार सामने आ जाता है।
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एक बार फिर ऐसा हुआ। वजह है सुप्रीम कोर्ट का फैसला, जिसमें कहा गया कि राजीव गांधी के हत्यारों को सजा-ए-मौत नहीं दी जाएगी। यह फैसला सियासत के दिग्गजों तक पहुंचने की देर थी और तूफान खड़ा हो गया।

लोकसभा चुनावों पर निगाह टिकाए तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता तुरंत हरकत में आईं और ऐलान कर दिया कि राजीव गांधी की हत्या के दोषियों को रिहा कर दिया जाएगा। सियासी बवाल मच गया।
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राहुल ने फेंका इमोशनल पासा

जाहिर है, तमिलनाडु में जयललिता ने चुनावी कार्ड खेला, तो उसका जवाब कांग्रेस को जल्द से जल्द देना था, वरना नुकसान बढ़ जाता। माहौल भी था और मौका भी।

अमेठी के दौरे पर निकले कांग्रेस उपाध्यक्ष और राजीव गांधी के बेटे राहुल ने मौका लपक लिया। और जोरदार हमला बोला। अमेठी से राजीव का पुराना नाता रहा है, जिसे उनकी राजनीतिक कर्मभूमि माना जाता है। जाहिर है, इस शहर में गांधी परिवार का इमोशनल कनेक्ट कहीं ज्यादा है।

राहुल गांधी ने इस मौके पर कहा, "मेरे पिता राजीव गांधी का यहां से प्यार रहा। और आप लोगों ने उन्हें खूब प्यार दिया। आज उनके हत्यारों की रिहाई की बात की जा रही है। जब प्रधानमंत्री को इंसाफ नहीं मिलता, तो आम जनता न्याय की उम्मीद कैसे करेगी? वैसे मैं खुद फांसी के खिलाफ हूं।"

राजीव के हत्यारों पर गर्म हुई राजनीति

राहुल गांधी जब ये दलील अमेठी की जनता के सामने रख रहे थे, तो लोगों ने उनकी भावनात्मक अपील का पूरा साथ दिया। कांग्रेस उपाध्यक्ष ने जब कहा कि प्रधानमंत्री के हत्यारों को छोड़ा जा रहा है, तो जनता ने 'शर्मनाक' कहकर जवाब दिया। जाहिर है। अपील का असर तुरंत हुआ।

अब इस घटनाक्रम के पीछे की पूरी कहानी को समझिए। दरअसल, राजीव गांधी के हत्यारों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सियासी रोटियां सेंकी जा रही हैं और लोकसभा चुनावों से ठीक पहले अपने-अपने क्षेत्र में इससे पूरा फायदा उठाने की राजनीति चमकाई गई है।

दरअसल, कोर्ट के फैसले के बाद जयललिता ने रिहाई की बात कहकर एक ही झटके में तमिल वोटों को अपने पक्ष में कर लिया। यह बात गौर करने वाली है कि उनके इस कदम से लिट्टे का समर्थन करने वाला तबका खुश हुआ होगा, हालांकि इससे पहले उन्होंने इस तरह का कोई बयान कभी नहीं दिया। लिट्टे के प्रति सहानुभूति रखने वाले तमिल डीएमके के वोट बेस का हिस्सा माने जाते हैं।

कुमार विश्वास को होगा नुकसान?

दूसरी तरफ राहुल गांधी और कांग्रेस खड़ी है। अमेठी हमेशा से कांग्रेस की हाई-प्रोफाइल सीट रही है और दूसरे राजनीतिक दलों ने गांधी परिवार के बड़े नामों के खिलाफ कोई दमदार दावेदार खड़ा करने की हिम्मत कभी नहीं दिखाई।

लेकिन इस बार बात कुछ अलग है। दिल्ली से पैदा हुई आम आदमी पार्टी देश भर में पांव पसार रही है और राहुल गांधी पर उसकी खास नजर है। ‌कविताओं में शब्द गूंथने वाले कुमार विश्वास राजनीति के मंच पर हैं और उन्हें उम्मीद है कि यहां भी वाहवाही मिलेगी।

राहुल गांधी ने राजीव गांधी की हत्या और हत्यारों का जिक्र कर कुमार की तरफ से मिल रही चुनौती को दरकिनार करने की कोशिश की है। दरअसल, कोर्ट ने कांग्रेस और जयललिता की एआईएडीएमके को यह मामला उछालने का 'परफेक्ट टाइम' दे दिया है।

सोनिया ने माफ किया, प्रियंका मिलने गईं

यह इस बात से जाहिर होता है कि गांधी परिवार बार-बार कहता रहा है कि वह फांसी की सजा के खिलाफ है। और तो और राजीव गांधी की पत्नी सोनिया गांधी राजीव की हत्या में शामिल नलिनी को माफ कर चुकी हैं।

यहां तक कि राहुल की बहन प्रियंका गांधी जेल में ‌उनसे मिलने पहुंची थीं। रिहाई पर राहुल का गुस्सा इमोशनल कनेक्‍शन बना देगा, लेकिन उन्हें यह भी याद होगा कि कांग्रेस 2004 में सत्ता तक आ गई थी और 11 साल इन दोषियों की दया याचिका राष्ट्रपति के पास लंबित पड़ी रही। लेकिन अब प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि रिहाई का फैसला सही नहीं हैं।

मनमोहन सिंह के मुताबिक रिहाई का फैसला न्याय के खिलाफ है। दूसरी तरफ जयललिता ने रिहाई की बात कहकर दोषियों के रिश्तेदारों, समर्थकों और तमिल समुदाय को खुश कर दिया है।

आसान नहीं है रिहाई, कांग्रेस भी जानती है

इस रिहाई पर भले सियासत गर्म हो गई है, लेकिन यह इतना आसान नहीं है। सरकार की तरफ से पुनर्विचार याचिका दाखिल की जा चुकी है और उस पर सुनवाई हो रही है।

साथ ही इन दोषियों के खिलाफ टाडा के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है, ऐसे में रिहा करने का फैसला तमिलनाडु सरकार बिना केंद्र की मंजूरी के नहीं ले सकती।

कांग्रेस और यूपीए सरकार को इस बात का इल्म है, लेकिन इसके बावजूद सार्वजनिक स्तर पर इस तरह की बयानबाजी इस बात का इशारा है कि वह चुनावों से पहले इस इमोशनल मामले को इस्तेमाल करने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस का कहना है कि राहुल को अपने‌ पिता के हत्यारों की रिहाई पर बोलने का पूरा हक है और उन्होंने बिलकुल ठीक कहा है।
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अम्मा ने खेला मास्टरस्ट्रोक, सब हैरान


लेकिन इस बार प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने की कोशिश में जुटीं जे जयललिता ने एक तीर से कई शिकार किए। उन्होंने ऐसा दांव खेला है कि सब चित हैं। चिर-प्रतिद्वंद्वी डीएमके उनकी बात का समर्थन कर रही है। प्रदेश भाजपा ने भी इस फैसले का स्वागत किया है।

यह एक ऐसा समझदार सियासी कदम है, जिसने तमिल सेंटीमेंट को सीधे अम्मा से जोड़ दिया है। एमडीएमके प्रमुख वाइको भी जया के इस दांव पर हैरान रह गए। उन्होंने कहा, "उन्होंने बेहद साहसी कदम उठाया है, जिसके लिए मैं उनका शुक्रिया अदा करता हूं।"

एक राजनीतिक जानकार ने कहा, "जयललिता का कदम मास्टरस्ट्रोक है। अगर उन्हें कुल 39 सीटों में से 35 से कम मिलती हैं, तो यह हैरान करेगा।"
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